टीचर की नौकरी छोड़ राजनीति में आए बैद्यनाथ राम, अब राज्यसभा में लहराएंगे पचरम

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 06 Jun 2026 4:41 PM

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झामुमो के राज्यसभा उम्मीदवार बैद्यनाथ राम. फोटो: प्रभात खबर

Rajya Sabha Election: झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने वाले बैद्यनाथ राम जदयू, भाजपा और झामुमो में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं. राज्यसभा पहुंचने पर वह लातेहार जिले से उच्च सदन में जाने वाले पहले व्यक्ति बन जाएंगे. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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लातेहार से चंद्र प्रकाश सिंह की रिपोर्ट

Rajya Sabha Election: झारखंड के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है. लातेहार जिले के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है, क्योंकि बैद्यनाथ राम राज्यसभा पहुंचने वाले जिले के पहले व्यक्ति बन सकते हैं. सोमवार को वह नामांकन पत्र खरीदेंगे और इसके साथ ही उनके राज्यसभा जाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

लातेहार के परसही गांव में हुआ जन्म

बैद्यनाथ राम का जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के परसही गांव में हुआ था. वर्तमान में उनका परिवार लातेहार शहर के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला में रहता है. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की. मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से पूरी की. इसके बाद बनवारी साहू महाविद्यालय, लातेहार से राजनीतिक शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की.

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में रहे शिक्षक

शिक्षा पूरी करने के बाद बैद्यनाथ राम ने लातेहार शहर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में लगभग तीन वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य किया. वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के साथ उन्होंने शिक्षण कार्य छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा. इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया.

जदयू से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

झारखंड गठन के वर्ष 2000 में ही बैद्यनाथ राम ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर पहली बार लातेहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. विधायक बनने के बाद उन्हें राज्य सरकार में खेल मंत्री बनाया गया. बाद में उन्होंने मद्य निषेध विभाग और स्वास्थ्य विभाग की भी जिम्मेदारी संभाली.

भाजपा में शामिल होकर बने शिक्षा मंत्री

वर्ष 2005 में बैद्यनाथ राम ने जदयू छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. भाजपा के टिकट पर उन्होंने लातेहार विधानसभा चुनाव जीता और राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री का पद संभाला. हालांकि वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी प्रकाश राम के हाथों हार का सामना करना पड़ा. वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा. इसके बाद 2019 में वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने प्रकाश राम को उम्मीदवार बना दिया. टिकट नहीं मिलने के बाद बैद्यनाथ राम ने भाजपा छोड़ दी और झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गए.

2019 में झामुमो से बने विधायक

झामुमो में शामिल होने के बाद बैद्यनाथ राम ने 2019 का विधानसभा चुनाव पार्टी के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संगठन और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है.

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लातेहार के लिए ऐतिहासिक अवसर

लातेहार विधानसभा क्षेत्र की एक विशेषता यह रही है कि यहां के मतदाताओं ने किसी विधायक को लगातार दो बार मौका नहीं दिया है. इसके बावजूद बैद्यनाथ राम ने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ अपनी मजबूत पहचान कायम रखी है. अब उनके राज्यसभा पहुंचने की संभावना से जिले में उत्साह का माहौल है. यदि उनका निर्वाचन होता है, तो वह राज्यसभा में पहुंचने वाले लातेहार जिले के पहले प्रतिनिधि बन जाएंगे.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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