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बिहार बाढ़: किसानों के अरमानों पर फिरा पानी, टूटी कमर, पानी में डूब गया बीज अब कैसे चुकायेंगे बटाई

Updated at : 20 Jul 2019 7:36 AM (IST)
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बिहार बाढ़: किसानों के अरमानों पर फिरा पानी, टूटी कमर, पानी में डूब गया बीज अब कैसे चुकायेंगे बटाई

फिरोज अख्तर औराई : लखनदेई नदी से निकल रहे बाढ़ के पानी ने खासकर सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है. अचानक बाढ़ के पानी ने बैगन, लौकी, हरी मिर्ची, करैला, भिंडी, घिउडा समेत सभी सब्जियों के पेड़ को लील लिया है, जिस से किसान औंधे मुंह गिर गए हैं. बड़ी सीमरी गांव के […]

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फिरोज अख्तर

औराई : लखनदेई नदी से निकल रहे बाढ़ के पानी ने खासकर सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है. अचानक बाढ़ के पानी ने बैगन, लौकी, हरी मिर्ची, करैला, भिंडी, घिउडा समेत सभी सब्जियों के पेड़ को लील लिया है, जिस से किसान औंधे मुंह गिर गए हैं. बड़ी सीमरी गांव के किसान उमेश प्रसाद, बथहू सहनी, ब्रह्मदेव प्रसाद, चंदेश्वर प्रसाद ने बताया कि हम लोग सब्जी उगा कर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. मगर बाढ़ के पानी ने सब्जी के पौधों को ही गला दिया. मधुबन बेशी गांव के किसान रविंद्र कुशवाहा, दिलीप कुशवाहा ने बताया कि बैंक से कर्ज लेकर लौकी व करैला की सब्जी की थी, मगर अब कुछ बचा नहीं तो बैंक का कर्ज अलग चुकाना पड़ेगा. वहीं रामखेतारी गांव के जेयाउल इस्लाम, बालम सहनी ने बताया कि पांच एकड़ की तैयार मक्के की फसल डूब गयी, अपना दर्द किसको बताएं. यही हाल प्रखंड के सभी गांवों के किसानों का है.

पानी में डूब गया बीज अब कैसे चुकायेंगे बटाई

मुजफ्फरपुर : कांटी के रामनाथ धमौली गांव की सोनिया देवी का घर व खेती बाढ़ में डूब चुकी है. चिंता है कि खेती बटाई पर की थी, अब बटाईदारी कैसे देंगी. बाढ़ ने लोगों को घर से बेघर कर दिया है. पीड़ित सामान लेकर सड़क किनारे डेरा डाल रहे हैं. सोनिया ने बताया कि गुरुवार की रात घर में पानी भर गया. आनन फानन में सामान सड़क किनारे रख दिया. बच्चे व बूढ़े को लेकर सड़क पर ही रात गुजारी. सोनिया ने पांच कट्ठा जमीन बटाई पर ली है. बारिश के बाद धान का बीज खेत में डाला था. बाढ़ ने सब लील कर ली. अब वह खायेगी क्या और खेत मालिक को चुकायेगी क्या. सोनिया की पड़ोसी सुनीता देवी का भी यही हाल है. उसने बताया कि घर में पानी घुस गया है. सभी सामान डूब गये. सोनिया व सुनीता के अलावा 10 घर और है, जो सड़क किनारे बसने पर मजबूर हैं. उमेश सहनी, राजकिशोर, लक्ष्मण भी इसी दर्द के मारे हैं. लक्ष्मण ने बताया कि रात में सड़क किनारे सोते हैं, तो गाड़ियों से कुचलने का खतरा बना रहता है. झोपड़ियों से कुछ दूर आगे पक्का मकान में रहने वाली सुदंश देवी का घर भी चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिरा है. बताया कि गुरुवार की रात पानी आया, तब से शुक्रवार दोपहर तक सामान हटा रहे हैं. सड़क के किनारे रहेंगे.
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