मुंगेर में कुपोषण दर 3.55 प्रतिशत, बावजूद एनआरसी तक नहीं पहुंच पा रहे बच्चे

Published by : RANA GAURI SHAN Updated At : 13 Feb 2026 6:27 PM

विज्ञापन

जिले के कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल व इलाज के लिए सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित किया जाता है.

विज्ञापन

अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच मात्र 123 बच्चे पहुंचे पोषण पुनर्वास केंद्र

मुंगेर. जिले के कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल व इलाज के लिए सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित किया जाता है. जहां स्वास्थ्य विभाग और आइसीडीएस के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों को यहां इलाज के लिए भेजा जाता है, लेकिन जिला प्रशासन के आइसीडीएस विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण जिले में कुपोषित बच्चों के मामले न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि ऐसे कुपोषित बच्चों को समुचित देखभाल व इलाज भी नहीं मिल पा रहा है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच सदर अस्पताल के एनआरसी वार्ड में कुल 123 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए लाया गया है, जबकि जिले में कुपोषण का दर 3.55 प्रतिशत है.

कुपोषित बच्चों के लिये एनआरसी वार्ड में 14 बेड की सुविधा

कुपोषित बच्चों के इलाज और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए सदर अस्पताल में 14 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) वार्ड संचालित हो रहा है़ यहां बच्चों को कुपोषण से बचाया जाता है. आइसीडीएस के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र व जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम दोनों द्वारा ही कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजना है. यहां कुपोषित बच्चों को 15 दिनों तक रखा जाता है. जहां उनके खाने-पीने का अलग से डायट निर्धारित होता है. इस वार्ड में कुपोषित बच्चों के साथ न केवल उनकी माताओं के रहने की भी सुविधा है, बल्कि कुपोषित बच्चों के इलाज अवधि तक इन बच्चों की माताओं को अलग से राशि का भुगतान भी किया जाता है.

आंगनबाड़ी केंद्र व स्वास्थ्य विभाग भी नहीं ले रहे दिलचस्पी

जिले के नौ प्रखंडों में से अधिकांश प्रखंडों में न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही आईसीडीएस विभाग कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक भेजने में दिलचस्पी ले रहे हैं. हाल यह है कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच जहां केवल 123 कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिये पहुंचे हैं. वही इसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से मात्र 27 कुपोषित बच्चों को ही रेफर कर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया है. इतना ही नहीं जिले के 9 प्रखंडों में कार्यरत राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 9 टीमों द्वारा इस दौरान केवल 18 कुपोषित बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिये भेजा गया है.

एनआरसी में नियमित चिकित्सक तक नहीं है उपलब्ध

सदर अस्पताल में भले ही कुपोषित बच्चों के लिये पोषण पुनर्वास केंद्र सालों से संचालित हो रहा है, लेकिन साल 2025 में मॉडल अस्पताल बनने के बाद से अबतक इसे शिफ्ट नहीं किया गया है, जबकि अन्य वार्डों को मॉडल अस्पताल में शिफ्ट कर देने से पोषण पुनर्वास केंद्र अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है. हद तो यह है कि सालों से यहां नियमित रूप से चिकित्सक नहीं है. दिसंबर 2025 में यहां विभाग से डॉ प्रेम प्रकाश को नियुक्त किया गया था, लेकिन वह भी आगे की पढ़ायी के लिये जा चुके हैं. ऐसे में पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चों के लिये नियमित रूप से चिकित्सक नहीं है. हाल यह है कि यदि रात या दिन में किसी समय यहां भर्ती बच्चे की तबीयत बिगड़ जाये तो उसे या तो इमरजेंसी वार्ड या पीकू वार्ड ले जाना पड़ता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

पोषण पुनर्वास केंद्र तक कुपोषित बच्चों को लाने की जिम्मेदारी आइसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग दोनों पर है. एनआरसी वार्ड को जल्द ही मॉडल अस्पताल में शिफ्ट किया जायेगा. इसके लिये वार्ड को तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

डॉ राजू, सिविल सर्जन

————————————-

अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक भर्ती कुपोषित बच्चे

माह भर्ती कुपोषित बच्चे रेफर होकर आये बच्चे

अप्रैल 5 0मई 22 1

जून 18 1जुलाई 8 0

अगस्त 9 1सितंबर 15 0

अक्तूबर 14 5नवंबर 8 5

दिसंबर 14 6जनवरी 2026 10 8

विज्ञापन
RANA GAURI SHAN

लेखक के बारे में

By RANA GAURI SHAN

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन