मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन : खेत से विद्युत टावर का तार ले जाने पर भड़के किसान

मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन निर्माण परियोजना के तहत गढ़ीरामपुर में खेतों से होकर विद्युत टावर का तार ले जाने को लेकर शुक्रवार को किसानों का आक्रोश फूट पड़ा.
गढ़ीरामपुर में प्रदर्शन, बोले- 30 प्रतिशत सर्किल वैल्यू मुआवजा मिले, नहीं तो होगा आंदोलन
मुंगेर. मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन निर्माण परियोजना के तहत गढ़ीरामपुर में खेतों से होकर विद्युत टावर का तार ले जाने को लेकर शुक्रवार को किसानों का आक्रोश फूट पड़ा. फोरलेन किनारे टावर गाड़ने और कृषि भूमि के ऊपर से हाइटेंशन तार ले जाने के विरोध में बड़ी संख्या में किसानों ने प्रदर्शन किया तथा एनएचएआइ अधिकारियों के समक्ष जोरदार विरोध दर्ज कराया.जानकारी के अनुसार, फोरलेन किनारे बड़े-बड़े विद्युत टावर करने को लेकर कार्य चल रहा था. जिसकी जानकारी गढ़ीरामपुर के भू-स्वामियों को हुई तो वहां भीड़ लग गया. भू-स्वामी और किसानों ने यह कहते हुए विरोध किया कि बिना मुआवजा दिये ही खेतों में टावर गाड़ने एवं खेतों के ऊपर से तार ले जाना न्यायोचित नहीं है. ग्रामीणों के विरोध की सूचना पर एनएचएआइ के अधिकारी नीतीश कुमार एवं निर्माण एजेंसी मोंटेकार्लो के प्रतिनिधि बमभोला सिंह किसानों से वार्ता करने गांव पहुंचे. इस दौरान अधिकारियों ने किसानों से कहा कि केवल फसल एवं पेड़ का ही मुआवजा दिया जायेगा. अधिकारियों की यह बात सुनते ही किसान भड़क उठे और सरकार की गाइडलाइन तथा न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए विरोध शुरू कर दिया. किसानों ने कहा कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा 14 जून 2024 को जारी गाइडलाइन के अनुसार जिस खेत से टावर का तार गुजरेगा, उस भूमि के लिए सर्किल वैल्यू का 30 प्रतिशत मुआवजा दिया जाना अनिवार्य है. वहीं जिस जमीन पर टावर स्थापित होगा, उसके लिए 200 प्रतिशत तक मुआवजा देने का प्रावधान है.
किसानों का आरोप था कि जब अधिकारियों से इस संबंध में बात की गयी तो उन्होंने कहा कि यह नियम बिहार में लागू नहीं है. इस पर किसानों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन सभी राज्यों के लिए समान रूप से लागू होता है. पाटम पूर्वी के पूर्व मुखिया शैलेश चौधरी ने कहा कि फोरलेन के किनारे स्थित जमीन गढ़ीरामपुर गांव के लोगों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है. यह क्षेत्र व्यवसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन रहा है, ऐसे में यहां टावर लगाए जाने से भूमि का महत्व प्रभावित होगा. विरोध करने वालों में मंटून सिंह, पन्नू सिंह, सदानंद चौधरी, सत्यम चौधरी, दिनेश चंद्र झा, राम बहादुर चौधरी, सुमित कुमार, अनुभव कुमार सहित बड़ी संख्या में भू-स्वामी और किसान मौजूद थे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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