जांच के घेरे में सात सिविल सर्जन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Sep 2016 4:56 AM

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दवा घोटाला. खरीद के लिए छह बार भुगतान, एक बार भी आपूर्ति नहीं स्वास्थ्य समिति मुंगेर के चर्चित दवा घोटाले में सात सिविल सर्जन तथा तीन जिला स्वास्थ्य प्रबंधक जांच की जद में हैं. इनके विरुद्ध कार्रवाई की संभावना है. मुंगेर : तत्कालीन सिविल सर्जन तथा डीपीएम के सांठगांठ से फेक दवा कंपनी को दवा […]

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दवा घोटाला. खरीद के लिए छह बार भुगतान, एक बार भी आपूर्ति नहीं

स्वास्थ्य समिति मुंगेर के चर्चित दवा घोटाले में सात सिविल सर्जन तथा तीन जिला स्वास्थ्य प्रबंधक जांच की जद में हैं. इनके विरुद्ध कार्रवाई की संभावना है.
मुंगेर : तत्कालीन सिविल सर्जन तथा डीपीएम के सांठगांठ से फेक दवा कंपनी को दवा खरीद के लिए अलग-अलग तिथि में सात लाख रुपये का भुगतान किया था. बावजूद दवा कंपनी द्वारा दवा की आपूर्ति नहीं की गई. इस दौरान तत्कालीन सिविल सर्जन ने कंपनी से न तो दवा का डिमांड किया और न ही भुगतान किये गये राशि की रिकवरी ही की़ हालांकि इस मामले में अब जब प्राथमिकी दर्ज की गयी है तो मुंगेर के सात सिविल सर्जन व तीन स्वास्थ्य प्रबंधक जांच के चपेट में हैं. जिनके विरुद्ध कार्रवाई की संभावना है.
छह किस्त में दिये सात लाख का भुगतान
वर्ष 2008-09 के बीच जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर द्वारा दवा कंपनी मेसर्स श्री कृष्णा फेविकोन्स प्राइवेट लिमिटेड हेतमपुर निवास रोड नंबर 2 शिवपुरी पटना को अलग- अलग तिथि में कुल 6 बार दवा खरीदारी के लिए 6 लाख 99 हजार 791 रुपये का भुगतान किया गया़ उस समय मुंगेर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ भोला प्रसाद सिन्हा थे़ जिला स्वास्थ्य समिति के विश्वसनीय सूत्रों की माने तो इनके मिली भगत के कारण ही 07 नम्बर 2008 को एक लाख 18 हजार 200 रुपये भुगतान करने पर जब कंपनी द्वारा दवा उपलब्ध नहीं कराया गया तो उसके बाद भी कंपनी को लगातार बिना दवा उपलब्ध कराये ही राशि दी जाती रही़ जबकि जांच में न तो उक्त कंपनी का पता चल रहा और न ही एड्रेस का.
किसी ने नहीं की कार्रवाई
दवा घोटाले में न सिर्फ तत्कालीन सिविल सर्जन व डीपीएम बल्कि उनके साथ- साथ 7 सिविल सर्जन तथा 3 डीपीएम पर भी गाज गिरने की संभावना जतायी जा रही है़ जुलाई 2009 में ही डॉ कृष्ण चंद्र सिंह ने सिविल सर्जन का पदभार संभाला तथा उनके बाद वर्ष 2010 में डॉ राकेश कुमार सिन्हा, डॉ आबिद हुसैन व डॉ मुकेश कुमार ने सिविल सर्जन का पदभार संभाला़ वहीं वर्ष 2012 में डॉ जवाहर सिंह तथा 2015 में डॉ रामेश्वर महतो इस पद पर काबिज हुए़
साथ ही डीपीएम के पद पर रागिनी कुमारी के बाद रविश कुमार तथा मो. नसीम पदस्थापित हुए़ किंतु इनमें से किसी ने भी राशि भुगतान के बावजूद कंपनी द्वारा दवा उपलब्ध नहीं कराने पर कार्रवाई नहीं की़ वर्तमान सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक के निर्देश पर दवा कंपनी मेसर्स श्री कृष्णा फेविकोन्स प्राइवेट लिमिटेड हेतमपुर निवास रोड नंबर 2 शिवपुरी पटना के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी है.
जांच टीम सौंप चुकी है रिपोर्ट
दवा आपूर्ति नहीं करने एवं अग्रिम राशि भुगतान के मामले में जब प्राथमिकी दर्ज करायी गयी तो पुलिस ने छानबीन प्रारंभ की. जिसके बाद सिविल सर्जन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया. जिसमें चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार, डॉ बहाबउद्दीन एवं डॉ अरविंद कुमार शामिल थे. उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में कई सवाल उठाये. सूत्रों की माने तो रिपोर्ट में दवा क्रय समिति, दवा से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी एवं कुछ पदाधिकारियों पर भी इस मामले में उदासीनता बरतने की बात कही गयी है. हालांकि फाइनेंसियल एक्सपर्ट द्वारा पूरे मामले की जांच कराने की बात कही गयी है़
कब-कब कंपनी के खाते में गयी अग्रिम राशि
तिथि राशि
07 नवंबर 2008 1,18,200 रुपये
04 अगस्त 2008 78,200 रुपये
07 अक्तूबर 2008 80,750 रुपये
29 दिसंबर 2008 66,560 रुपये
14 जनवरी 2009 1,97,750 रुपये
14 जनवरी 2009 1,58,331 रुपये
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