कर्मियों पर गिर सकती है गाज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Sep 2016 4:18 AM

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दवा घोटाला . तीन सदस्यीय जांच टीम ने सौंपी रिपोर्ट दवा घोटाले की पुलिसिया जांच प्रारंभ हो गयी है. इसमें कई स्वास्थ्यकर्मी व पदाधिकारी पर गाज गिर सकती है. मुंगेर : अग्रिम राशि भुगतान के बावजूद दवा आपूर्ति नहीं करने के मामले में सिविल सर्जन द्वारा कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. एसडीपीओ […]

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दवा घोटाला . तीन सदस्यीय जांच टीम ने सौंपी रिपोर्ट

दवा घोटाले की पुलिसिया जांच प्रारंभ हो गयी है. इसमें कई स्वास्थ्यकर्मी व पदाधिकारी पर गाज गिर सकती है.
मुंगेर : अग्रिम राशि भुगतान के बावजूद दवा आपूर्ति नहीं करने के मामले में सिविल सर्जन द्वारा कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. एसडीपीओ ललित मोहन शर्मा मंगलवार को जांच के लिए सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ एवं तीन सदस्यीय जांच टीम से मुलाकात की. साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति एवं केंद्रीय दवा भंडार गृह पहुंच कर दवा खरीद से संबंधित फाइलों का अवलोकन किया.
क्या है मामला : जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर द्वारा दवा आपूर्ति को लेकर अलग-अलग तिथि में 6 लाख 99 हजार 791 रुपये का भुगतान करने के बावजूद दवा कंपनी द्वारा दवा की आपूर्ति नहीं की गई. जब दवा कंपनी के पता पर दवा की आपूर्ति करने या पैसा वापस करने का नोटिस भेजा गया, तो नोटिस बिना तामिला के वापस चला आया.
उस पता पर बताया गया कि इस नाम की कोई कंपनी यहां नहीं है. राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्रांक 2125 के माध्यम से 26 जून 2016 को सिविल सर्जन को दवा कंपनी मेसर्स श्री कृष्णा फेविकोन्स प्राइवेट लिमिटेड हेतमपुर निवास रोड नंबर 2 शिवपुरी पटना के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिया. लेकिन काफी विलंब से कोतवाली थाना में दवा कंपनी के संचालकों के खिलाफ सिविल सर्जन ने कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी.
विलंब के कारण उठ रहे सवाल : दवा कंपनी से दवा आपूर्ति नहीं होने के लंबे समय बाद दवा कंपनियों पर कार्रवाई प्रारंभ हुई. इतना ही नहीं राज्य स्वास्थ्य समिति से वर्षों बाद आयी कार्रवाई की चिट्टी मिलने के एक माह बाद कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. कार्रवाई में विलंब होने के कारण कई सवाल उठाये जा रहे है. अनुसंधानकर्ता पुलिस का मामना है कि आखिर बिना दवा आपूर्ति के लगातार 2008 से 2009 तक क्यों कंपनी के खाते अग्रिम राशि का भुगतान होता रहा. अगर दवा आपूर्ति संबंधित कंपनी ने नहीं किया तो उसके खिलाफ उसी समय प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयी.
जांच को पहुंचे एसडीपीओ : एसडीपीओ ललित मोहन शर्मा मंगलवार को जांच के लिए सदर अस्पताल पहुंचे. अस्तपाल में सिविल सर्जन नहीं मिले और उन्हें कहा गया कि उनका पैर टूटा हुआ और वह आवास से ही कार्य संचालित कर रहे है. जिसके बाद एसडीपीओ आवास पर पहुंच कर मामले के संबंध में छानबीन की.
बाद में वे जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय पहुंचे और उस समय दवा खरीद के फाइलों का अवलोकन किया. साथ ही केंद्रीय दवा भंडार पहुंच कर मामले की तहकीकात की. एसडीपीओ से जब मामले के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहां कि एसपी आशीष भारती के निर्देश पर वे जांच के लिए यहां आये है. अभी जांच चल ही रहा है.
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