ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे केमिस्टों का अस्तित्व खतरे में, पलामू में 20 मई को बंद रहेंगी दुकानें
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 14 May 2026 8:17 PM
पलामू में बैठक करते छोटे दवा कारोबारी. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में पलामू की सभी दवा दुकानें 20 मई को बंद रहेंगी. केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कॉरपोरेट कंपनियों की नीतियों से छोटे दवा व्यवसायियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में दवा व्यवसायियों ने बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है. पलामू केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने 20 मई को जिले की सभी दवा दुकानों को बंद रखने की घोषणा की है. यह बंदी ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर की जा रही है. दवा व्यवसायियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों की नीतियों से छोटे केमिस्टों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.
प्रेस वार्ता में आंदोलन की घोषणा
इस संबंध में परिसदन में संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई. प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत प्रसाद जायसवाल और सचिव धर्मेंद्र उपाध्याय ने आंदोलन की रूपरेखा और मांगों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म नियमों में मौजूद शिथिलता का फायदा उठाकर दवा कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं. इससे स्थानीय दवा दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है.
छोटे केमिस्टों के सामने रोजी-रोटी का संकट
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर भारी छूट देकर दवाओं की बिक्री कर रहे हैं. इसका सीधा असर छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यवसायियों पर पड़ रहा है. धर्मेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो छोटे केमिस्टों का अस्तित्व समाप्त होने की स्थिति पैदा हो सकती है. उन्होंने कहा कि दवा व्यवसाय केवल व्यापार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है.
अनियंत्रित दवा बिक्री पर जताई चिंता
दवा व्यवसायियों ने एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि बिना उचित नियंत्रण के ऐसी दवाओं की बिक्री भविष्य में गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा कर सकती है. उन्होंने कहा कि कई बार बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लोगों तक पहुंच रही हैं, जिससे दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है.
कोरोना काल की अधिसूचना पर उठाए सवाल
एसोसिएशन ने कोरोना काल के दौरान 26 मार्च 2020 को जारी अस्थायी अधिसूचना को लेकर भी सवाल उठाए. पदाधिकारियों ने कहा कि महामारी के दौरान दी गई राहत व्यवस्था को अब तक जारी रखा गया है, जिससे औषधि नियम 65 के कड़े प्रावधान कमजोर पड़ रहे हैं. दवा व्यवसायियों का कहना है कि इस अधिसूचना की वापसी में हो रही देरी से ई-फार्मेसी कंपनियों को लगातार फायदा मिल रहा है.
सरकार से की सख्त नियम लागू करने की मांग
एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लागू करने की मांग की है. साथ ही कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही अनुचित छूट पर रोक लगाने और सभी दवा विक्रेताओं के लिए समान अवसर की नीति लागू करने की अपील की गई. व्यवसायियों ने कहा कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
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20 मई को बंद रहेंगी दवा दुकानें
पलामू केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि 20 मई को जिले की सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी. इस दौरान ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा. प्रेस वार्ता में विनोद पाठक, असगर हुसैन, उदय कुमार सिंह, अविनाश कुमार सिन्हा और रंजीत कुमार समेत बड़ी संख्या में दवा व्यवसायी मौजूद रहे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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