निर्देशों का नहीं हो रहा पालन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Sep 2016 6:24 AM

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दुखद . आयुक्त ने दो अगस्त को किया था सदर अस्पताल का निरीक्षण एक माह बाद भी सदर अस्पताल में न तो आइसीयू सेवा चालू हुआ और न ही डायलेशन की व्यवस्था की गयी. निर्देश के बावजूद अभी भी आइसीयू में खराब पड़े मशीन को ठीक नहीं कराया गया है. मुंगेर : प्रमंडलीय आयुक्त नवीन […]

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दुखद . आयुक्त ने दो अगस्त को किया था सदर अस्पताल का निरीक्षण

एक माह बाद भी सदर अस्पताल में न तो आइसीयू सेवा चालू हुआ और न ही डायलेशन की व्यवस्था की गयी. निर्देश के बावजूद अभी भी आइसीयू में खराब पड़े मशीन को ठीक नहीं कराया गया है.
मुंगेर : प्रमंडलीय आयुक्त नवीन चंद्र झा पिछले 2 अगस्त को सदर अस्पताल के विभिन्न विभागों का गहन निरीक्षण किये थे और उन्होंने चिकित्सकीय सेवा के साथ-साथ मरीजों की सुविधाओं में कई खामियों को दूर करने का निर्देश दिया था. आयुक्त ने सिविल सर्जन तथा अस्पताल उपाधीक्षक को बंद पड़े आइसीयू को चालू करने, यहां डायलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने, कैदी वार्ड में पेयजल व शौचालय की व्यवस्था, जर्जर पोषण पुनर्वास केंद्र को शिशु वार्ड में स्थानांतरित करने तथा सदर प्रखंड में पदस्थापित हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ निरंजन कुमार को सदर अस्पताल में पदस्थापित करने का निर्देश दिया था.
आयुक्त के निर्देश के 40 दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग एवं अस्पताल प्रबंधन ने अपनी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं की. अलबत्ता आयुक्त के आदेश का भी पालन नहीं हुआ.
आइसीयू में खराब पड़े मशीन नहीं हुए हैं ठीक
आयुक्त ने आइसीयू में लगे एक वेंडीलेटर तथा एक डी-फीब्रीलेटर खराब होने की बात सुन कर कहा था कि जितना जल्द हो सके खराब मशीनों को ठीक करवा लें तथा चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिलाकर आइसीयू सेवा आरंभ करें. किंतु न तो आइसीयू में खराब पड़े मशीन को ही अबतक ठीक करवाया गया है और न ही चिकित्सकों को प्रशिक्षण ही दिलवाया गया है़
शौचालय व पेयजल विहीन है कैदी वार्ड
आयुक्त ने कैदी वार्ड जाकर इलाजरत कैदियों की भी सुधि लेते हुए निर्देश देते हुए अविलंब वार्ड के भीतर ही शौचालय व पेयजल की व्यवस्था करने को कहा था़ किंतु हकीकत यही है कि आज भी कैदी वार्ड शौचालय व पेयजल विहीन है़
शिशु वार्ड में शिफ्ट नहीं हुआ एनआरसी
पोषण पुनर्वास केंद्र की जर्जर स्थिति को देखते हुए आयुक्त ने अस्पताल उपाधीक्षक को निर्देश दिया था कि इसे अविलंब शिशु वार्ड में ही शिफ्ट कर दिया जाये़ जिससे इलाज के दौरान किसी प्रकार के खतरे की संभावना नहीं रहे़ किंतु अस्पताल प्रबंधन ने अब तक आयुक्त के निर्देश पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी़
कहते हैं अधिकारी
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि बाढ़ के कारण अस्पताल की व्यवस्था को सुदृढ करने एवं आयुक्त के निर्देशों के पालन में विलंब हुआ है. अब शीघ्र ही पूरी व्यवस्था को दुरुस्त किया जायेगा.
अब तक दूर नहीं हुई आइसीयू की बदहाली
निरीक्षण के दौरान आई हॉस्पीटल को बदहाल स्थिति को देख आयुक्त ने निर्देश दिया था कि बेगूसराय तथा मुंगेर में एक साथ ही आई हॉस्पीटल बना है़ किंतु वहां और यहां में जमीन आसमान का अंतर है़ उन्होंने अस्पताल उपाधीक्षक तथा प्रबंधक निर्देश दिया कि व्यवस्था को जल्द से जल्द सुधार लें. एक महीने के बाद वे फिर से अस्पताल का निरीक्षण करेंगे़ किंतु एक माह बाद भी आई हॉस्पीटल की बदहाली दूर नहीं हुई. विदित हो कि आइ हॉस्पीटल का भवन जर्जर है. जबकि वहां के ऑपरेशन थिएटर का संयंत्र भी खराब है.
ठंडे बस्ते में डायलेशन की व्यवस्था
आयुक्त ने सिविल सर्जन तथा डीपीएम से कहा था कि मुंगेर प्रमंडल के सभी जिले में डायलेशेन की व्यवस्था उपलब्ध है़ किंतु मुंगेर में अबतक डायलेशन की व्यवस्था आरंभ नहीं हो पायी है़ जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है़ उन्होंने कहा कि इनके लिए वे दोनों जिलाधिकारी का सहयोग लेकर अविलंब डायलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करें. किंतु निरीक्षण के बाद आयुक्त के निर्देश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया़
डॉ निरंजन को नहीं लाया गया सदर अस्पताल
सदर अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ आरके गुप्ता के शिकायत पर आयुक्त ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सदर प्रखंड में पदस्थापित हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ निरंजन कुमार को सदर अस्पताल में पदस्थापित करने का निर्देश दिया था़ किंतु आजतक डॉ निरंजन कुमार को सदर अस्पताल में पदस्थापित नहीं किया गया है़ जिसके कारण एक ही हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है़
जीओपीडी में नहीं है पानी की व्यवस्था
आयुक्त ने जीओपीडी में चिकित्सक के हाथ धोने तक के लिए पानी की व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की थी. इस बात को लेकर वे अस्पताल उपाधीक्षक पर झल्ला उठे थे़ उन्होंने कहा था कि यहां की व्यवस्था तो पूरी तरह बीमार है़ ऐसे में तो चिकित्सक को ही इन्फेक्शन हो जायेगा़ यहां पानी की व्यवस्था अविलंब होनी चाहिए़ किंतु आज भी यहां पर व्यवस्था जस की तस है़
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