शहरी पीएचसी खोलने में भेदभाव, उठी न्याय की मांग
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंगेर : राज्य के मुखिया नीतीश कुमार का मूल मंत्र है न्याय के साथ विकास. अर्थात विकास न्यायपूर्ण हो और इसमें कोई भेदभाव न हो. विकास चहुमुंखी हो और समग्र हो. लेकिन मुंगेर नगर निगम प्रशासन विकास के मामले में भेदभाव बरत रहा है. चाहे शहर में समाज के निचले तबके के लिए खोले जाने […]
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मुंगेर : राज्य के मुखिया नीतीश कुमार का मूल मंत्र है न्याय के साथ विकास. अर्थात विकास न्यायपूर्ण हो और इसमें कोई भेदभाव न हो. विकास चहुमुंखी हो और समग्र हो. लेकिन मुंगेर नगर निगम प्रशासन विकास के मामले में भेदभाव बरत रहा है.
चाहे शहर में समाज के निचले तबके के लिए खोले जाने वाले शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला हो या फिर शहरवासियों को शुद्ध पेयजल व रोशनी उपलब्ध कराने की बात हो. यहां विकास कुछ मुट्ठी भर लोगों के हाथों का खिलौना बन गया है. इस बात से नगर निगम के वार्ड पार्षद भी सहमत हैं कि विकास में भेदभाव बरती जा रही है.
मुंगेर शहर 45 वार्डों में फैला है. जिसका क्षेत्र लाल दरवाजा गंगा तट से लेकर हेरूदियारा-सफियाबाद राष्ट्रीय उच्च पथ 80 तक फैला है. पूरब में हाजीसुजान से लेकर पश्चिम में गंगा तट का इलाका है.
इस क्षेत्र के समग्र विकास की जिम्मेदारी मुंगेर नगर निगम प्रशासन की है. लेकिन निगम को चलाने वाले ही जब विकास में भेदभाव बरते तो समग्र विकास कैसे होगा. पिछले दिनों शहर में चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति ने नगर निगम को स्थल चयन की जिम्मेदारी दी.
लेकिन जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों ने अपने घरों तक ही विकास की रोशनी को सिमटा दिया. फलत: एक बड़ा क्षेत्र अंधेरा ही रह गया. चयनकर्ताओं ने महज 200 गज की दूरी पर दो-दो पीएचसी खुलवा दिये तो दूसरी ओर महादलित बस्ती पूअर हाउस के नाम से खोला गया पीएचसी माधोपुर के पॉश इलाके में खोल दिया गया. अब हाल यह है कि इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं. हर कोई जिम्मेदारी को फुटबॉल की तरह दूसरे के पाले में फेंक रहे हैं. स्वास्थ्य महकमा से लेकर नगर निगम प्रशासन अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं. लेकिन सच तो यही है कि विकास कुछ मुट्ठी भर घरों में सिमटता जा रहा और शहर का बड़ा तबका विकास की बाट ही जोह रहा.
वार्ड नंबर 39 के पार्षद सोनी अमजद का कहना है कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोलने में भेदभाव किया गया है. एक भी पीएचसी अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र में नहीं खोला गया और वार्ड नंबर 32 एवं 29 में महज कुछ दूरी पर ही दो-दो पीएचसी खोल दिया गया. जिसका उपयोग भी नहीं है.
वार्ड नंबर 42 के पार्षद सुनील राय ने कहा कि शहरी पीएचसी का चयन गलत तरीके से किया गया है. उत्तरी क्षेत्र हसनगंज, बिंदवारा, कासिम बाजार का एक बड़ा इलाका को छोड़ दिया गया है.
मेयर द्वारा निगम क्षेत्र में विकास के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है. दोहरी नीति का ही परिणाम है कि अपने घर के पास दो-दो पीएचसी खोल दिया गया है. जबकि कई मलिन व गंदी बस्ती के लोग इससे वंचित रह गये. वार्ड नंबर 9 के पार्षद नीलू सिंह का कहना है कि मेयर द्वारा शहरी पीएचसी के स्थल चयन में मनमानी की गयी है. नगर निगम के वार्ड पार्षदों को स्थल चयन के मामले में कोई मंतव्य तक नहीं लिया गया. अपने कुछ खास करीबी पार्षदों को उपकृत करने के लिए पूअर हाउस के पीएचसी को माधोपुर में खोल दिया गया है जो पूरी तरह अनुचित है.
वार्ड नंबर 15 के पार्षद मो. जाहिद ने कहा कि 200 गज की दूरी पर दो पीएचसी खोला जाना कहीं से उचित नहीं है. शहरी पीएचसी खोलने के नाम पर निगम प्रशासन द्वारा भेदभाव बरता गया है. जबकि वार्ड नंबर 15 में मुर्गियाचक, रिफ्यूजी कॉलोनी, पूरबसराय मुसहरी में सैकड़ों महादलित रहते हैं. बावजूद इस वार्ड में एक भी पीएचसी नहीं खोला गया.
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