मोनू के मामले में अस्पताल प्रबंधन पुलिस को उपलब्ध नहीं करा पायी सीसीटीवी फुटेज

Updated at : 06 Sep 2019 6:34 AM (IST)
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मोनू के मामले में अस्पताल प्रबंधन पुलिस को उपलब्ध नहीं करा पायी सीसीटीवी फुटेज

मुंगेर : जमालपुर डीह निवासी घायल मोनू का सदर अस्पताल में इलाज तथा बिना पुलिस को सूचना दिये रहस्यमय तरीके से भागलपुर भेजे जाने के मामले में जहां पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. वहीं स्वास्थ्य विभाग अब भी बेफिक्र नजर आ रही है. जबकि इस मामले में सदर अस्पताल प्रबंधन तथा चिकित्सक की […]

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मुंगेर : जमालपुर डीह निवासी घायल मोनू का सदर अस्पताल में इलाज तथा बिना पुलिस को सूचना दिये रहस्यमय तरीके से भागलपुर भेजे जाने के मामले में जहां पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. वहीं स्वास्थ्य विभाग अब भी बेफिक्र नजर आ रही है.

जबकि इस मामले में सदर अस्पताल प्रबंधन तथा चिकित्सक की लापरवाही खुलकर सामने आ चुकी है. बावजूद अब तक अस्पताल प्रबंधन व संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है. इतना ही नहीं पुलिस द्वारा मांग किये जाने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा उसे सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराया गया.
14 जून की रात मोनू को किया गया था अस्पताल में भर्ती: बताया जाता है कि पिछले 14 जून की रात 9:25 बजे कुछ लोगों ने मोनू को अज्ञात बताते हुए घायल अवस्था में इलाज के लिए सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया था. उस वक्त इमरजेंसी वार्ड के ड्यूटी में चिकित्सक डॉ रामप्रवेश प्रसाद मौजूद थे.
उन्होंने अज्ञात रूप से घायल अवस्था में पहुंचे मोनू के संबंध में न तो ओडी स्लिप काटा और न ही स्थानीय थाना पुलिस को इसकी जानकारी दी. जबकि ऐसी स्थिति में हर हालत में पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होता है. इतना ही नहीं रात भर मोनू का इलाज इमरजेंसी वार्ड में ही चलता रहा और सुबह चिकित्सक ने उसे बेहतर इलाज के लिए हाईयर सेंटर रेफर कर दिया.
इसके बाद मोनू को सदर अस्पताल से लेकर कौन भागलपुर गया, इसके बारे में अस्पताल प्रबंधन के पास कोई जानकारी नहीं है. इस मामले में कासिम बाजार थाना पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन से पांच बिंदुओं पर जानकारी मांगी.
जिसमें मोनू की उम्र, ओडी कटा था या नहीं, उसे रेफर किया गया था या नहीं, मोनू को इलाज के लिए कहां ले जाया गया तथा 14 जून की वीडियो फुटेज की मांग की गयी थी. इस संबंध में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ सुधीर कुमार ने पुलिस को बताया है कि मोनू की उम्र 22 वर्ष दर्ज की गयी थी. उसे बेहतर इलाज के लिए हाईयर सेंटर रेफर किया गया था. उसे कहां ले जाया गया, इसकी जानकारी नहीं है तथा उस दिन का वीडियो फुटेज भी उपलब्ध नहीं है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि अज्ञात घायल के संबंध में चिकित्सक द्वारा ओडी नहीं काटा जाना, घोर लापरवाही है. इस संबंध में अस्पताल उपाधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण पूछा जाये.
सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था पर उठ रहा सवाल
पुलिस का मानना है कि यदि 14 जून का वीडियो फुटेज मिल जाये तो मोनू के मामले से जुड़े कई मामले खुद ही सुलझ जायेंगे. पुलिस द्वारा सीसीटीवी फुटेज की मांग पर अस्पताल उपाधीक्षक ने हाथ खड़ा करते हुए जवाब दे दिया कि उनके अस्पताल में 15 दिनों से अधिक समय तक का वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं रहता है.
जबकि इस घटना के बीते ढ़ाई माह से ऊपर हो चुके हैं. ऐसे में वीडियो फुटेज उपलब्ध कराना संभव नहीं है. मालूम हो कि तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार पाल ने अस्पताल निरीक्षण के दौरान जब सीसीटीवी कैमरे के वीडियो फुटेज के स्टोरेज के संबंध में अस्पताल प्रबंधक से पूछा था तो उन्हें भी बताया गया था कि यहां 15 दिनों तक का ही वीडियो फुटेज रिकॉर्ड में रहता है.
जिस पर आयुक्त ने अस्पताल प्रबंधक को निर्देश दिया था कि हर 15 दिन का वीडियो फुटेज सीडी या किसी स्टोरेज डिवाइस में स्टोर कर सुरक्षित रखा जाये, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.
किंतु अस्पताल प्रबंधन ने शायद प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश का पालन नहीं किया. यदि उनके निर्देश का पालन किया होता तो आज मोनू से संबंधित वीडियो फुटेज का रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाता और पुलिस को इस मामले के अनुसंधान में काफी मदद मिलती.
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