13 साल की उम्र में पकड़ ली थीं कूची
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :26 Jan 2017 6:58 AM
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मधुबनी : विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग कला ने एक बार फिर जिले को देश के मानचित्र पर स्थापित कर दिया है. फिर इस जिले के कलाकार को पद्मश्री पुरस्कार दिये जाने की घोषणा सरकार ने की है. इस बार यह पुरस्कार जितवारपुर गांव निवासी बौआ देवी को दिया जायेगा. बौआ देवी को पुरस्कार दिये जाने […]
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मधुबनी : विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग कला ने एक बार फिर जिले को देश के मानचित्र पर स्थापित कर दिया है. फिर इस जिले के कलाकार को पद्मश्री पुरस्कार दिये जाने की घोषणा सरकार ने की है. इस बार यह पुरस्कार जितवारपुर गांव निवासी बौआ देवी को दिया जायेगा. बौआ देवी को पुरस्कार दिये जाने की घोषणा से ही जिले के कलाप्रेमी से लेकर आम लोगों में खुशी की लहर व्याप्त है.
बचपन से ही कर रहीं पेंटिंग : बौआ देवी बताती है कि वह प्रारंभिक दौर की कलाकार है. जिस समय में यह कला उतनी प्रसिद्ध नहीं थी. इनके समकालीन कई कलाकारों को कई पुरस्कार मिल चुका है. बताती है कि पद्मश्री महासुंदरी देवी, सीता देवी उनके समकालीन कलाकारों में शामिल हैं. इस पुरस्कार की घोषणा से वे काफी खुश हैं. यह संयोग ही है कि जिस समय उन्हें पुरस्कार दिये जाने की सूचना मिली. वे दिल्ली में ही अपने घर में बैठे कोई पेंटिंग ही कर रही थी. उन्हें यह जानकारी जब गृहमंत्रालय से मिली तो पूरे घर में खुशी की लहर छा गयी.
11 बार जा चुकी हैं जापान : मिथिला पेंटिंग की सिद्धहस्त माने जाने वाली बौआ देवी की कला का परचम देश से बाहर अन्य देशों में भी लहरा रहा है. अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बौआ देवी 11 बार जापान जाकर वहां महीनों रहकर कई कार्यक्रमों में मिथिला पेंटिंग कर चुकी है. इसके अलावे फ्रांस, ब्रिटेन, लंदन में भी उनके बनाये पेंटिंग मौजूद हैं. वहीं देश के विभिन्न राज्यों में उनके कला की मांग होती रहती है.
धैर्य से करें काम : बौआ देवी नये कलाकारों को धैर्य से काम करने की नसीहत देती हैं. बताती है कि पहले के कला में और अब के कला में काफी बदलाव हो गया है. यह बदलाव सराहनीय है. नये कलाकार बहुत कम समय में बहुत कुछ करना चाहते हैं. देश विदेश में नये नये तकनीक से अपनी कला को प्रदर्शित भी कर रहे हैं. पर उन्हें धैर्य से काम लेना चाहिए.
यादों में बसी नाग-नागिन कला :
बौआ देवी हजारों यादगार कलाकृति बना चुकी है. इसमें अधिकांश प्राकृतिक रचनाएं हैं. बताती है कि उनका हर कलाकृति खुद के कल्पना पर ही आधारित होता है. इसमें नाग नागिन की कला उनके लिये यादगार है.
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