आठ हजार रुपये की नौकरी देने का दिया था झांसा

मुक्त हुए पांडव सदा, रंजीत सदा, राम शिव सदा बताते हैं कि कटैया के प्रकाश सदा ने इन गांव के युवाओं को यह कह कर बेगलुरू ले गया कि हर माह कम से कम आठ हजार रूपये क नौकरी और अच्छा खाना पीना व कपड़ा भी देगा. पर हुआ ठीक उल्टा. जिस कंपनी मे ये […]
मुक्त हुए पांडव सदा, रंजीत सदा, राम शिव सदा बताते हैं कि कटैया के प्रकाश सदा ने इन गांव के युवाओं को यह कह कर बेगलुरू ले गया कि हर माह कम से कम आठ हजार रूपये क नौकरी और अच्छा खाना पीना व कपड़ा भी देगा. पर हुआ ठीक उल्टा. जिस कंपनी मे ये लोग काम करते थे वह एक प्लास्टिक के धुलाई का कंपनी था. आठ हजार की बात कौन कहे. हर सप्ताह रविवार के दिन मात्र एक सौ रूपये ही इन मजदूरों को दिया जाता था. खाना में चावल, पानी की तरह दाल, सब्जी के नाम पर उबला हुआ आलू और नमक. बीते दो माह में इन लोगों ने कभी भी रोटी नहीं खाया. रोते हुए बताते हैं कि जब कभी इन लोगों की तबीयत खराब होती तो दवा भी नहीं दिया जाता.
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