मधेपुरा में सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, निजी जांच केंद्रों के भरोसे मरीज, बढ़ रहा आर्थिक बोझ

Updated:
विज्ञापन

मधेपुरा में सदर अस्पताल

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Madhepura Sadar Hospital: मधेपुरा में डॉक्टर लिख रहे अल्ट्रासाउंड जांच, लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं. गरीब मरीज मजबूरी में खर्च कर रहे हजारों रुपये

विज्ञापन

मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

विज्ञापन

Madhepura Sadar Hospital: मधेपुरा सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की नियमित सुविधा नहीं होने से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है. इसका सीधा असर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों की जेब पर पड़ रहा है.

सदर अस्पताल में पेट दर्द, किडनी, लीवर और अन्य आंतरिक बीमारियों से संबंधित मरीजों को डॉक्टर अक्सर अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह देते हैं. लेकिन अस्पताल परिसर में यह सुविधा सामान्य मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं होने से उन्हें बाहर निजी केंद्रों पर जांच करानी पड़ती है.

सरकारी अस्पताल में जांच नहीं, निजी सेंटर में बढ़ा खर्च

मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बावजूद उन्हें जांच के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है. निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों में 800 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी है.

शहर के एक मरीज रामलाल यादव ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें तत्काल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी थी, लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी सेंटर पर 1200 रुपये खर्च करने पड़े.

Madhepura Sadar Hospital: मशीन है, लेकिन विशेषज्ञ की कमी बनी बाधा

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सचिन ने बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध है. हालांकि रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण इसका नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है. फिलहाल अल्ट्रासाउंड की सुविधा केवल प्रसव संबंधी मामलों में सीमित रूप से दी जा रही है.

विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.

मरीजों ने उठाए प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है. उनका कहना है कि यदि समय रहते रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो मरीजों का आर्थिक शोषण लगातार जारी रहेगा.

स्वास्थ्य योजनाओं पर उठ रहे सवाल

सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई आवश्यक सुविधाएं अब भी अधूरी हैं. सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधा का अभाव इन दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है.

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अस्पताल में जल्द नियमित अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल की जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिल सके और उन्हें निजी केंद्रों पर अतिरिक्त खर्च न करना पड़े.

Also Read : बिहार में पीएम स्वनिधि योजना की समीक्षा में बड़ा खुलासा, सारण से प्राप्त 566 आवेदन में सिर्फ 258 को ही मिला ऋण

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन