ललिया गांव में नहीं बनी 1 किमी सड़क, बरसात में कट जाता है संपर्क

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 10 Jun 2026 3:45 PM

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सड़क के लिए तरस रहे ललिया गांव के लोग

Madhepura News: सिर्फ 1 किलोमीटर सड़क की कमी ने हजारों लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी है. बरसात आते ही ललिया गांव का संपर्क दुनिया से लगभग कट जाता है.

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ग्वालपाड़ा (मधेपुरा) से प्रतिनिधि.

Madhepura News: विकास के दावों के बीच मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा प्रखंड का ललिया गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है. गांव में करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण अब तक नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और लोगों का आवागमन लगभग ठप पड़ जाता है.

सड़क नहीं, मुश्किलों का सफर है ललिया गांव की पहचान

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. गांव के लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए कच्चे रास्ते का सहारा लेना पड़ता है. बारिश होने पर यह रास्ता इतना खराब हो जाता है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार लोग फिसलकर घायल हो चुके हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है.

बीमार पड़ने पर बढ़ जाती है परेशानी

सड़क नहीं होने का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है. ग्रामीणों के अनुसार यदि गांव में कोई व्यक्ति अचानक बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस सीधे गांव तक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में मरीजों को किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. कई बार लोगों को लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर भी बन आती है.

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं. गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

आक्रोश मार्च के बाद भी नहीं बदली स्थिति

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया गया. यहां तक कि गांव के लोगों ने आक्रोश मार्च निकालकर अपनी नाराजगी भी जताई थी. इसके बावजूद सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी.

लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन मिलने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक गांव की परेशानी खत्म होने वाली नहीं है.

विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी सड़क

स्थानीय लोगों के अनुसार ललिया गांव सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है और यह मार्ग मधेपुरा सहित आसपास के कई इलाकों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सड़क निर्माण होने से न सिर्फ हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

ग्रामीणों का मानना है कि सड़क बनने से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी. साथ ही गांव का संपर्क मुख्य बाजार और सरकारी सेवाओं से बेहतर हो सकेगा.

प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन

सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है. इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी पंकज कुमार घोष ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है. उनका कहना है कि वर्षों से मिल रहे आश्वासनों के बजाय अब जमीन पर काम दिखना चाहिए, ताकि ललिया गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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