करोड़ों के वाहनों की हो रही मट्टिीपलीत

Published at :26 Dec 2015 6:45 PM (IST)
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करोड़ों के वाहनों की हो रही मट्टिीपलीत

करोड़ों के वाहनों की हो रही मिट्टीपलीत फोटो:::::::::::नहीं है -उदासीनता . थानों में जब्त वाहनों का नहीं करायी जा रही निलामी– जटिल नियमावली बनी बाधक –प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज निलामी की जटिल नियमावली रहने के कारण अनुमंडल के विभिन्न थानों में पुलिस द्वारा जब्त किये गये बाइक व अन्य वाहनों को जंग खा रहा है. अगर निलामी […]

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करोड़ों के वाहनों की हो रही मिट्टीपलीत फोटो:::::::::::नहीं है -उदासीनता . थानों में जब्त वाहनों का नहीं करायी जा रही निलामी– जटिल नियमावली बनी बाधक –प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज निलामी की जटिल नियमावली रहने के कारण अनुमंडल के विभिन्न थानों में पुलिस द्वारा जब्त किये गये बाइक व अन्य वाहनों को जंग खा रहा है. अगर निलामी सरल रहा होता तो राज्य सरकार को लाखों रुपये राजस्व का मुनाफा होता. अनुमंडल मुख्यालय थाना के अलावे बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा, पुरैनी, चौसा, रतवारा, आलमनगर थाना के साथ – साथ अरार, फुलौत ओपी पुलिस द्वारा बगैर आवश्यक कागजात के जब्त किये गये करीब दो सौ से भी अधिक बाइक व अन्य वाहनों की निलामी दशकों से नहीं किये जाने के कारण जंग खा रहा है. कई गाडि़यों का अब तो नामों निशान नहीं बच पाया है. पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जब्त किये गये वाहनों के निलामी करने का अधिकार सीधे तौर पर विभाग को नहीं है. निलामी का प्रस्ताव थाना से तैयार कर एसपी के माध्यम से कोर्ट से पास भेजना पड़ता है. फिर कोर्ट चक्कर थानेदार को लग जाता है. कोर्ट में लंबी प्रक्रिया पूरी करना पुलिस की जिम्मेदारी बन जाती है. इस वजह से जब्त किये गये वाहनों की निलामी के लिए पुलिस आगे नहीं आती है. जबकि जब्त वाहनों की निलामी से राज्य सरकार को काफी राजस्व का मुनाफा होता. लेकिन निलामी प्रक्रिया पैंचिदा रहने के कारण ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा है. अगर निलामी प्रक्रिया को सरल बना दिया जाय तो उससे सरकार को ही फायदा होगा. लेकिन इसके लिए पुलिस विभाग के वरीय पदाधिकारी को थाना को सख्त निर्देश दिया जाना चाहिए. — वर्जन — थानाध्यक्ष द्वारा निलामी का प्रस्ताव क्यों नहीं दिया जाता है, इस संदर्भ में मैं कुछ भी बताने से असमर्थ हूं. चूंकि यह मेरे क्षेत्राधिकार से बाहर है. रहमत अली, एसडीपीओ, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा.

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