बाल दीदी कार्यकर्ताओं ने मंत्री का किया घेराव

Published at :22 Dec 2015 6:40 PM (IST)
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बाल दीदी कार्यकर्ताओं ने मंत्री का किया घेराव

बाल दीदी कार्यकर्ताओं ने मंत्री का किया घेराव फोटो – मधेपुरा 01 कैप्शन – जिला अतिथिगृह में बाल दीदी संघ के कार्यकर्ताओं की मांग पत्र को पढ़ते मंत्री – न्यायालय द्वारा सेवा समायोजन के आदेश को लागू कराने की मांग की- जिला अतिथि गृह में आपदा प्रबंधन मंत्री ने सुनी संघ कार्यकर्ताओं की बात प्रतिनिधि, […]

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बाल दीदी कार्यकर्ताओं ने मंत्री का किया घेराव फोटो – मधेपुरा 01 कैप्शन – जिला अतिथिगृह में बाल दीदी संघ के कार्यकर्ताओं की मांग पत्र को पढ़ते मंत्री – न्यायालय द्वारा सेवा समायोजन के आदेश को लागू कराने की मांग की- जिला अतिथि गृह में आपदा प्रबंधन मंत्री ने सुनी संघ कार्यकर्ताओं की बात प्रतिनिधि, मधेपुरा बाल वर्ग दीदी संघ के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित जिला अतिथि गृह में मधेपुरा विधायक सह आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो चंद्रशेखर का घेराव कर अपनी मांगे उनके सामने रखी. इस मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने उनलोगों की बात को मुख्यमंत्री के सामने रखने का भरोसा दिया. इसके बाद उनका घेराव समाप्त किया गया. सेवा समायोजन करने की मांग करते हुए बिहार राज्य बाल वर्ग दीदी संघ के कार्यकर्ता अतिथि गृह भवन पहुंचीं. बाल वर्ग दीदी संघ की प्रदेश अध्यक्ष रेखा कुमारी ने कहा कि उनसे दस वर्ष तक सेवा लेने के बाद अब सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है. जबकि न्यायालय ने भी उनकी सेवा का समायोजन करने का आदेश सरकार को दिया है. आदेश का अनुपालन नहीं कर न्यायालय की अवमानना की जा रही है. उनकी सेवा का समायोजन करने के बजाय उनकी सेवा समाप्त करने की साजिश की गयी है. कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी सेवा वापस करते हुए इसे स्थायी किया जाना चाहिए. अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो वे लोग पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी. आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने बाल दीदी संघ के कार्यकर्ताओं की बात ध्यान से सुनने के बाद उनकी बातों को मुख्यमंत्री तक पहंुचाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि वह पूरी कोशिश करेंगे कि इस मामले से संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाये. इसके बाद घेराव समाप्त कर दिया गया. सेवा समाप्त करना है अन्याय बिहार राज्य बाल वर्ग दीदी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रेखा कुमारी ने बताया कि दस साल की सेवा के बाद सेवा समाप्त कर देना अन्याय है. गांवों और कस्बों में छोटो बच्चों को स्कूल की ओर उन्मुख करने के लिए बाल वर्ग दीदी को रखा गया था. सर्व शिक्षा अभियान के तहत बिहार शिक्षा परियोजना के अंतर्गत उन्हें नियोजित किया गया था. इसमें तीन से छह साल के बच्चों को स्कूल तक लाना था. बाल वर्ग दीदी को शुरुआती दौर में पांच सौ रूपये मानदेय का भुगतान किया जाता था. बाद में इसे बढ़ा कर 750 रूपये किया गया. फिर एक हजार रुपये और बाद में तीन हजाररूपये मानदेय कर दिया गया. मानदेय का भुगतान विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा किया जाता था. न्यायालय ने भी जब उनके सेवा का समायोजन करने का निर्णय दिया है तो सरकार को संवेदनशील हो कर इस पर विचार करना चाहिए.

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