कुपोषित बच्चों के लिए पोषण संबंधी देखभाल प्रदान करता है पोषण पुनर्वास केंद्र

Published by : Rajeev Murarai Sinha Sinha Updated At : 24 Dec 2025 6:58 PM

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पोषण पुनर्वास केंद्र एक स्वास्थ्य सुविधा है, जहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है और उनका इलाज किया जाता है. इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का प्रबंधन करना है.

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यहां कुपोषित बच्चों के खानपान व देखभाल की रहती हैं विशेष सुविधाएं

प्रतिनिधि, लखीसराय. पोषण पुनर्वास केंद्र एक स्वास्थ्य सुविधा है, जहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है और उनका इलाज किया जाता है. इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का प्रबंधन करना है. इसके साथ इन बच्चों के माताओं या देखभाल करने वालों को पोषण और स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करने और उनका प्रबंधन करने के लिए परामर्श के साथ सहायता प्रदान की जाती है. इस बात की जानकारी देते हुए सिविल-सर्जन डॉ उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों को 14 दिनों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है. जहां बच्चों को चिकित्सा और पोषण संबंधी देखभाल उपलब्ध की जाती है. उन्होंने बताया की केंद्र में बच्चों को लाने के लिए जिले के सभी प्रभारी के साथ प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक को ये निर्देश दिया गया है कि उनके यहां आशा हो या आंगनबाड़ी सेविका अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण के दौरान कुपोषित बच्चे की पहचान कर अपने नजदीकी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को जानकरी दें एवं कुपोषित बच्चे के माता-पिता के साथ जागरूक भी करें. साथ ही अगर जरूरत पड़े तो बच्चे को सदर अस्पताल में स्थित पुनर्वास केंद्र तक ले जाने में मदद भी करें. इस की निगरानी भी लगातार करते रहें.

पुनर्वास केंद्र में बच्चों का रखा जाता है विशेष ख्याल

डीपीसी सुनील कुमार ने बताया की पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उनके खान-पान का विशेष ख्याल रखा जाता है. यहां रखे गये बच्चे यदि 14 दिनों अंदर कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाते तो वैसे बच्चों को 21 दिन तक विशेष रूप से देखभाल की जाती है. पुनर्वास केंद्र में भर्ती हुए बच्चे, वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही डिस्चार्ज किये जाते हैं. पोषण पुर्नवास केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं नि:शुल्क होती हैं. डीपीसी बताते हैं की बच्चा डिस्चार्ज होने के बाद हर 15 दिन के बाद पोषण पुनर्वास केंद्र में जांच के लिए अपने माता-पिता के साथ आना पड़ता है, जिसमें आशा भी उनकी सहायता करती है. इस कार्य के लिए आशा या लाभार्थी के माता-पिता को 250 रुपये मिलता है. साथ ही लाभार्थी के माता-पिता को अलग से प्रत्येक दिन के लिए 100 रुपये प्र्तोत्साहन के रूप में दिया जाता है.

कुपोषण के शिकार बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किये गये हैं. इसके तहत बच्चों की विशेष जांच जैसे उनका वजन व बांह आदि का माप किया जाता है. इसके साथ हीं छह माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बांई भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वो कुपोषित माने जाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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