10 फरवरी से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन का महाअभियान
Updated at : 08 Feb 2026 6:20 PM (IST)
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10 फरवरी से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन का महाअभियान
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सदर अस्पताल में मीडिया कार्यशाला आयोजित, 11 लाख से अधिक लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य
लखीसराय. जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से आगामी 10 फरवरी 2026 से सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है. इस अभियान की सफलता और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा सीफार के सहयोग से सदर अस्पताल के सभागार में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में मीडिया कर्मियों को अभियान की बारीकियों और फाइलेरिया से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.11 फरवरी को आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगेगा मेगा कैंप
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ राकेश कुमार ने बताया कि इस बार अभियान को गति देने के लिए 11 फरवरी को सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर ”मेगा एमडीए कैंप” लगाया जाएगा. इसमें बूथ स्तर पर स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे. उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए लोगों को दवा खिलाएंगे, जबकि अंतिम 3 दिनों में स्कूलों में बूथ लगाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जाएगा.खाली पेट न खाएं दवा, रैपिड रिस्पांस टीम रहेगी तैनात
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया कि जिले के कुल 11,14,234 लाभार्थियों को दवा खिलाने के लिए 580 टीमें बनायी गयी हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा का वितरण नहीं होगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी अपनी मौजूदगी में दवा खिलाएंगे. बताया गया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं व अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा नही लेनी है. दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है. दवा पूरी तरह सुरक्षित है व बीपी, शुगर व अर्थराइटिस के मरीज भी इसे ले सकते हैं. दवा खाने के बाद मितली या चक्कर आए, तो यह शरीर में परजीवी होने का संकेत है. आपात स्थिति के लिए हर ब्लॉक में रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी.लगातार पांच साल दवा का सेवन ही एकमात्र बचाव
पिरामल के जिला प्रतिनिधि गौतम कुमार झा ने फाइलेरिया की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मच्छर के काटने से फैलने वाला रोग है जो लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. इससे हाथीपांव और हाइड्रोसील जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं. यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 साल तक साल में एक बार इन दवाओं का सेवन कर लेता है, तो जीवन भर उसे फाइलेरिया होने की संभावना समाप्त हो जाती है. मौके पर मौजूद रहे अधिकारी इस अवसर पर सदर अस्पताल प्रबंधक नंद किशोर भारती, वेक्टर जनित नियंत्रण पदाधिकारी शालिनी कुमारी, डब्ल्यूएचओ के जिला प्रतिनिधि अजय कुमार समेत सीफार और पिरामल के प्रतिनिधि एवं मीडिया कर्मी उपस्थित थे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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By Rajeev Murarai Sinha Sinha
Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.
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