लखीसराय में बच्चों को सिखाया गया गुड टच और बैड टच का फर्क

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 27 May 2026 10:48 AM

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लखीसराय के 'स्कूल ऑफ साइंस एंड बायोजेनेसिस' में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को सुरक्षित बचपन और पोक्सो एक्ट की जानकारी दी गई

POCSO Awareness Program: लखीसराय के 'स्कूल ऑफ साइंस एंड बायोजेनेसिस' में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को सुरक्षित बचपन और पोक्सो एक्ट की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में बच्चों को गुड टच और बैड टच की पहचान करना भी सिखाया गया.

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लखीसराय से राजेश कुमार की रिपोर्ट.

POCSO Awareness Program: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर स्थानीय ‘स्कूल ऑफ साइंस एंड बायोजेनेसिस’ में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सैयद मोहम्मद शब्बीर आलम और सचिव विद्यानंद सागर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों को पोक्सो एक्ट, सुरक्षित बचपन और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया.

सुरक्षित बचपन को लेकर बच्चों को किया गया जागरूक

कार्यक्रम का मुख्य विषय “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य एवं पोक्सो अधिनियम” था. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के डायरेक्टर दयानंद यादव ने की, जबकि मंच संचालन प्राधिकार मित्र जूली कुमारी ने किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मी मौजूद रहे.

पोक्सो एक्ट को बताया बच्चों की सुरक्षा का कवच

प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि पोक्सो एक्ट 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को हर प्रकार के यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ एक अधिनियम नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की मजबूत ढाल है.

उन्होंने बताया कि पोक्सो एक्ट के तहत अपराध की गंभीरता के अनुसार न्यूनतम तीन वर्ष की सजा से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है.

बच्चों को समझाया गया गुड चट और बैड टच

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को व्यावहारिक तरीके से गुड टच और बैड टच के बीच का अंतर समझाया गया. अधिवक्ता सीतेश सुधांशु ने बच्चों से कहा कि किसी भी संदिग्ध व्यवहार या असहज स्थिति में बिना डरे तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी दें.

उन्होंने बच्चों को बताया कि किसी भी आपात स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर 24 घंटे संपर्क किया जा सकता है.

पीड़ित की पहचान उजागर करना है अपराध

कार्यक्रम में पोक्सो एक्ट की कानूनी बारीकियों की भी जानकारी दी गई. अधिवक्ता ने कहा कि किसी भी बच्चे के साथ अपराध की जानकारी मिलने पर शिकायत करना हर नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है. साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित बच्चे का नाम, पता या फोटो सार्वजनिक करना कानूनन अपराध है.

जागरूकता से ही सुरक्षित होगा भविष्य

कार्यक्रम के अंत में बच्चों को सतर्क रहने, अपने अधिकारों को जानने और गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया. विद्यालय प्रबंधन ने भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की बात कही.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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