गुरु प्रदोष व्रत पर करें इस कथा का पाठ, जानें कैसे शिव कृपा से इंद्र ने पाई वृत्तासुर पर विजय

Published by : Neha Kumari Updated At : 27 May 2026 11:20 AM

विज्ञापन

शिवलिंग पर जल अर्पित करते हुए सांकेतिक तस्वीर

Pradosh Vrat 2026: गुरू प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना के साथ व्रत कथा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है. कहते है व्रत कथा के पाठ से भगवान शिव प्रस्न्न होता है और पूजा का फल दो गुणा हो जाता है.

विज्ञापन

Pradosh Vrat 2026: 28 मई, गुरुवार को ]प्रदोष व्रत रखा जाएगा. शास्त्रो के अनुसार जब यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘गुरु प्रदोष’ कहा जाता है. यह व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और जीवन के बड़े से बड़े संकटों से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं देवराज इंद्र ने भी अपने स्वर्ग और साम्राज्य को वापस पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था. आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत से जुड़ी यह रोचक कथा, जो बताती है कि अनजाने में की गई एक भूल किस प्रकार जीवन बदल सकती है और कैसे महादेव की भक्ति हर संकट को दूर कर देती है.

गुरु प्रदोष व्रत कथा

देवताओं और वृत्तासुर के बीच युद्ध

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक बार देवराज इंद्र और असुरों के राजा वृत्तासुर के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया. इंद्र की सेना असुरों पर भारी पड़ने लगी. अपनी सेना को हारता देख वृत्तासुर क्रोधित हो उठा. उसने अपनी मायावी शक्तियों से एक विशाल और भयावह रूप धारण कर लिया. वृत्तासुर का विकराल रूप देखकर सभी देवता भयभीत हो गए और देवगुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे.

गुरु बृहस्पति ने बताया वृत्तासुर का रहस्य

देवताओं को भयभीत देखकर गुरु बृहस्पति बोले, “हे देवताओं! जिससे तुम डर रहे हो, पहले उसका वास्तविक स्वरूप जानो. वृत्तासुर कोई साधारण राक्षस नहीं, बल्कि एक महान तपस्वी और कर्मनिष्ठ जीव है.” गुरु बृहस्पति ने बताया कि पिछले जन्म में वृत्तासुर का नाम राजा चित्ररथ था. वह भगवान शिव का परम भक्त था. एक बार राजा चित्ररथ अपने दिव्य विमान से भ्रमण करते हुए कैलाश पर्वत पहुंचे. वहां उन्होंने देखा कि भगवान शिव की सभा लगी हुई है और माता पार्वती भगवान शिव की वाम गोद में विराजमान हैं.

यह दृश्य देखकर चित्ररथ अपनी हंसी नहीं रोक पाए और व्यंग्य करते हुए बोले, “प्रभु! हम साधारण मनुष्य तो मोह-माया में पड़कर अपनी पत्नियों के वश में रहते हैं, लेकिन देवलोक में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा कि कोई अपनी पत्नी को गले लगाकर सभा में बैठा हो.” चित्ररथ की यह बात सुनकर भगवान शिव केवल मुस्कुरा दिए. उन्होंने शांत स्वर में कहा, “हे राजन! मेरा दृष्टिकोण संसार से अलग है. मैंने कालकूट जैसा विष भी धारण किया है, फिर भी तुम सामान्य मनुष्यों की तरह मेरा उपहास कर रहे हो.”

माता पार्वती ने दिया श्राप

माता पार्वती को चित्ररथ का यह व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं आया. वे क्रोधित होकर बोलीं, “मूर्ख! तुमने न केवल महादेव, बल्कि मेरा भी अपमान किया है. तुम्हें अपने वैभव और शक्ति का बहुत घमंड है. इसलिए मैं तुम्हें श्राप देती हूं कि तुम इसी क्षण अपने विमान से नीचे गिरो और राक्षस योनि को प्राप्त हो जाओ.”

माता पार्वती के श्राप के कारण राजा चित्ररथ राक्षस योनि में चले गए. आगे चलकर ‘त्वष्टा’ नामक ऋषि के महान यज्ञ के प्रभाव से उनका जन्म वृत्तासुर के रूप में हुआ. राक्षस बनने के बाद भी उनके हृदय में भगवान शिव के प्रति अटूट भक्ति बनी रही.

पूरी कथा सुनाने के बाद गुरु बृहस्पति ने इंद्र से कहा, “हे इंद्र! वृत्तासुर को पराजित करना आसान नहीं है, क्योंकि वह शिवभक्त है. यदि तुम विजय प्राप्त करना चाहते हो, तो श्रद्धा और विधि-विधान से गुरु प्रदोष व्रत करो तथा भगवान शिव को प्रसन्न करो.”

गुरु प्रदोष व्रत से इंद्र को मिली विजय

देवराज इंद्र ने गुरु बृहस्पति की आज्ञा का पालन करते हुए पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक गुरु प्रदोष व्रत किया. भगवान शिव की कृपा और व्रत के पुण्य प्रभाव से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली. इसके बाद स्वर्गलोक में पुनः शांति स्थापित हो गई.

यह भी पढ़ें: Religion News in Hindi – Spiritual News, Hindi Religion News, Today Panchang, Astrology at Prabhat Khabar

विज्ञापन
Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola