जीविका बना जीवन का आधार, महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर

प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रखंड परियोजना कार्यालय में महिला स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जीविका के माध्यम से प्रत्येक महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने को लेकर दस हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है
हलसी. प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रखंड परियोजना कार्यालय में महिला स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जीविका के माध्यम से प्रत्येक महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने को लेकर दस हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है. जिसको लेकर ग्रामीण स्तर पर भी महिला जीविका समूह में जुड़ने को लेकर अफरा तफरी मची हुई. इस दिशा में जीविका दीदियों को स्वयं सहायता समूह, बैंकों से जोड़ कर, आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. जिससे वे स्वरोजगार कर सके, पूंजीगत उपलब्धता से अपने उद्यम को आगे बढ़ा सके. सूक्ष्म उद्यम, आधुनिक विधि से खेती, चाय पत्ता, अनानास आदि नकदी फसल उत्पादन, पशुपालन, लघु कुटीर उद्योग के माध्यम से स्वावलंबित हो सके. इस ओर जीविका के माध्यम से कई कदम उठाये गये हैं. प्रखंड परियोजना प्रबंधक पदाधिकारी (बीपीएम) धर्मवीर कुमार ने बताया कि हलसी में 1243 लोगों को समूह के द्वारा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है. वहीं सात सितंबर के पूर्व दो सौ लोगों का समूह के द्वारा महिलाओं का आवेदन जमा करने कि प्रक्रिया कि जा रही है. उन्होंने बताया कि नये समूह को लेकर 15 सितंबर से प्रक्रिया की जायेगी. नये समूह में जुड़ने को लेकर पहले महिलाओं की उम्र 18 से 60 होनी आवश्यक है. वहीं जो महिलाएं समूह में जुड़ रही हैं, वह स्वयं या उनके पति सरकारी या संविदा कर्मी न हो, वही समूह में जुड़ने को लेकर दस्तावेज आधार कार्ड का छायाप्रति, बैंक पासबुक का छायाप्रति एवं स्व रोजगार प्रपत्र सह स्व घोषणा प्रपत्र को भरकर नजदीकी ग्राम संगठन के पास सचिव, अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, भीओ या सीएम जीविका के पास जाकर जमा कर सकते हैं. समूह के जुड़ने के लिए कोई फीस नहीं लिया जायेगा. वहीं जीविका समूह में जुड़ने के बाद जीविका दीदियों को सतत जीविकोपार्जन योजना का लाभ दिया गया है. उन्होंने कहा कि आधी आबादी के सशक्तिकरण से परिवार और समाज मजबूत बनेगा. जीविका के माध्यम से महिलाएं सशक्त बन रही हैं. वे मुखर हो रही हैं. घर के चहारदीवारी से बाहर निकल कर अपने हित के लिए काम कर रही हैं. सामुदायिक संगठन में नियमित बैठक, बचत, आपसी ऋण लेन-देन, लेखांकन, ससमय ऋण की वापसी जैसे कार्य कर वे अपनी संस्था और खुद को मजबूत कर रही हैं. विकास के साथ-साथ, जीविका दीदियां, समाज सुधार के कार्यों में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं. बाल विवाह रोकथाम, दहेज प्रथा निवारण, नशा बंदी जैसे सामाजिक कार्यों में अपनी भागीदारी दे रही हैं. जीविका दीदियों के सामूहिक, सकारात्मक और रचनात्मक प्रयास से सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अनुकरणीय कार्य किया जा रहा है. जीविका दीदियां अपनी जिजीविषा, मेहनत, लगन से आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं.
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By Rajeev Murarai Sinha Sinha
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