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बड़हिया व मोकामा टाल क्षेत्र में करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं बदली सूरत

Updated at : 24 May 2024 7:02 PM (IST)
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बड़हिया व मोकामा टाल क्षेत्र में करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं बदली सूरत

बड़हिया व मोकामा टाल क्षेत्र के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है.

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लखीसराय. जिले के बड़हिया व मोकामा टाल क्षेत्र के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है जबकि टाल क्षेत्र से जल निकासी के लिए बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बख्तियारपुर द्वारा पइन की गाद हटाने एवं उड़ाही के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिये गये लेकिन टाल क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति नवंबर माह तक बनी हुई रहती है. जिसके कारण किसान फसल को लेट लतीफ से कर पाते हैं, जिससे किसानों को जितना फसल का उत्पाद मिलना चाहिये, उस हिसाब से उन्हें फसल का उत्पाद नहीं मिल पाता है. बड़हिया-मोकामा टाल क्षेत्र के एक आंकड़े के मुताबिक करीब 8 हजार बीघा जमीन में नवंबर माह तक जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. वर्ष 2020 से पूर्व बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल बख्तियारपुर के द्वारा लगभग 48 करोड़ रुपये की लागत से पइन की गाद का साफ-सफाई के साथ उड़ाही का कार्य किया गया है. उक्त बात की खुलासा आरटीआई सेल भाजपा के प्रदेश संयोजक सतीश कुमार शर्मा ने बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल बख्तियारपुर से आरटीआई के माध्यम से मांग की विभाग ने अपने पत्रांक 137 दिनांक 03 फरवरी को रिपोर्ट उपलब्ध कराया है जिसमे 61पइन के अलावा 2022-23 में 41 करोड़ रुपये की लागत से 74 पइन की साफ-सफाई किया गया है इस तरह 89 करोड़ की लागत से 135 पइन की साफ-सफाई की गयी है.

पइन की साफ-सफाई के बाद भी नवंबर माह तक रहता है जलजमाव

पइन की साफ-सफाई के बाद भी नवंबर माह के एक पखवाड़ा तक टाल क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति बनी हुई रहती है, पूर्व में बरसात के दिनों में टाल से सटे छोटी छोटी नदियां भर जाती है, जिसके कारण टाल में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. सितंबर माह में छोटी छोटी नदियां की पानी गंगा में चली जाती थी, जिससे कि टाल क्षेत्र में सितंबर माह से ही पानी की निकासी हो जाती थी और किसानों को जलजमाव से छुटकारा मिल जाता था लेकिन पइन खुदाई एवं साफ-सफाई के नाम पर पुराना रास्ता भी बंद कर दिया गया, जिससे कि नवंबर माह तक जल जमाव की स्थिति बनी रहती है.

आदर्श बुआई के समय में टाल क्षेत्र के कुछ हिस्से में नहीं होती है बुआई

टाल क्षेत्र में आदर्श बुआई के समय 15 अक्तूबर से 15 नवंबर तक माना जाता है लेकिन टाल क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इस समय तक बुआई नहीं हो पाती है, जिसके कारण फसल की अच्छा मात्रा किसानों को नहीं मिल पाता है.

कहते हैं किसान

टाल क्षेत्र के किसान पंकज कुमार सिंह, नवीन सिंह, रामनारायण सिंह, संजीव सिंह का कहना है कि टाल क्षेत्र में पानी की निकासी अक्टूबर के अंतिम माह एवं नवंबर के प्रथम सप्ताह में हो जाता है, फिर खेत को सूखने दिया जाता है, इसके जोत आबाद कर बुआई की जाती है. किसानों ने बताया कि पइन की साफ-सफाई अभी भी चल रहा है, किसानों को पइन की साफ-सफाई से कोई खास फायदा नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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