जब कहीं समस्या का समाधान नहीं मिले तो गुरु के चरण में लें शरण: मोरारी बापू

Published by : Rajeev Murarai Sinha Sinha Updated At : 06 Jan 2026 7:22 PM

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वर्तमान में रामचरितमानस दुनिया का सबसे अंतिम ग्रंथ रामकथा सार्वभौम और सार्वजनिक, इसमें में प्रवेश करते ही सभी हो जाते हैं दीक्षित कथा के चौथे दिन श्रृंगी ऋषि व भगवान राम के बाल्यकाल प्रसंग का किया वर्णन अशोक धाम में चल रहा मोरारी बापू का नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन लखीसराय. प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर के समीप चल रहे नौ दिवसीय श्रृंगी ऋषि मानस पर आधारित रामकथा के चौथे दिन मंगलवार को मोरारी बापू ने श्रृंगी ऋषि एवं बाल्यावस्था के भगवान राम के माता कौशल्या से संवाद का वर्णन किया. कथा के आरंभ में मोरारी बापू ने वेद पढ़ने का अधिकार को लेकर विवाद पर बड़ी सहजता व सरलता से चर्चा की. उन्होंने कहा कि वेद बोलने का अधिकार कुछ लोग को है, कुछ लोग को नहीं है, ऐसी भी एक बात आयी. सही गलत बोलने का अधिकार हमें नहीं है, लेकिन रामकथा सार्वभौम और सार्वजनिक होती है. यहां हम सब कथा में प्रवेश करते ही दीक्षित हो जाते हैं. जब कथा में प्रवेश करने पर हम दीक्षित हो जाते हैं तब कोई भी मंत्र बोलने का हमें अधिकार होता है. इस दौरान बापू के साथ लोगों ने जय सियाराम का नारा भी लगाया. उन्होंने कहा कि उनके अनुसार रामचरित्रमानस दुनिया का सबसे अंतिम ग्रंथ है. भविष्य में आवश्यकतानुसार और ग्रंथ हो सकते हैं, मगर अभी अंतिम ग्रंथ रामचरितमानस ही उनके समझ से है. रामचरित्र मानस के अध्ययन कर मनुष्य जीवन के सभी कर्म का सहजता पूर्वक निर्वहन कर सकता है. गुरु की महिमा का चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब कहीं से समस्या का समाधान नहीं मिले तो अपने गुरु के चरण में जायें. अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु आपकी हर समस्या का समाधान हैं. श्रृंगी ऋषि के एक श्लोक का वर्णन करते हुए बापू ने कहा कि इस श्लोक का संबंध रामचरित्र मानस में श्रृंगी ऋषि प्रसंग से है. श्रृंगी ऋषि के आशीर्वाद से पुत्र के रूप में भगवान को प्राप्त करने के बाद माता कौशल्या के नर नहीं आम बालक के रूप में उन्हें बाल्य सुख देने का चर्चा करते हुए बापू ने कहा कि जब भगवान राम माता कौशल्या की इच्छानुसार नर रूप में प्रकट हुए तो माता कौशल्या ने कहा कि आप तो स्वयं नारायण के रूप में प्रकट हुए हैं. मुझे तो अपनी कोख से बाल्य रूप में अपने पुत्र के रूप में आपको देखना है. तब नारायण ने माता कौशल्या की इच्छा को पूर्ति करते हुए बाल रूप में राजा दशरथ के घर जन्म के रूप में अवतार लिये. रामचरित्र मानस के विभिन्न श्लोक व प्रसंग का स्मरण उदाहरण सहित श्रद्धालुओं को कराते हुए बापू ने सभी को निस्वार्थ व अभिलाषा रहित प्रभु भक्ति करने का आग्रह किया. कथा के चौथे दिन मंगलवार को मौसम में बदलाव सुबह से धूप आने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में अच्छा खासा इजाफा देखा गया. कथा के लगभग साढ़े तीन घंटे के अंतराल में श्रद्धालुओं को पूरी एकाग्रचित होकर मोरारी बापू के प्रवचन में ध्यानमग्न देखा गया. कथा के दौरान बापू सरल व सहज श्लोक को सभी श्रद्धालुओं के साथ दोहराते रहे भी थे. आयोजन समिति के सदस्य डॉ कुमार अमित एवं डॉ प्रवीण कुमार सिन्हा ने बताया कि कथा समापन के उपरांत सभी श्रद्धालुओं को इच्छानुसार अशोक धाम मंदिर परिसर में प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण कराया गया.

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