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बिहार में बौद्ध पुरास्थलों का है भंडार : बौद्धिष्ट

Updated at : 14 Nov 2024 11:24 PM (IST)
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बिहार में बौद्ध पुरास्थलों का है भंडार : बौद्धिष्ट

नाथ पब्लिक स्कूल के बच्चों ने किया बौद्ध सर्किट लाली पहाड़ी का दर्शन

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लखीसराय. बिहार वैश्विक स्तर पर बौद्ध पुरास्थलों का भंडार है, यहां के लाली पहाड़ी और काली पहाड़ी में बौद्ध की मूर्तियां व मंदिर निहित है. सरकार ततपरता से इसकी खुदाई करे, यहां हां की पहचान बहुत बड़ा पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगी. उक्त बातें गुरुवार को लाली पहाड़ी बौद्ध सर्किट भ्रमण के दौरान भूटान के बौद्धिष्ट पेमा डोरजी ने कही. उन्होंने स्वीकार किया कि यह स्थल श्रीमद धम विहार के नाम से जाना जाता था. बिहार के पर्यटन स्थलों में बौद्ध सर्किट की विशेष पहचान है. लाली और काली दोनों पहाड़ी बौद्ध सर्किट का एक महत्वपूर्ण पार्ट है, लाली पहाड़ी पर भूटानी बौद्धिष्ट पेमा डोरजी दो बड़ा मैप लेकर पहुंचे थे. उन्होंने स्कूली बच्चों को मैप के जरिये रेखांकित कर विस्तार से समझाया. उनके साथ केरल के सचिन केरला एवं लखीसराय पुरानी बाजार संगम वेंक्वेट के मालिक व इतिहासकार अशोक कुमार सिंह भी थे. उन्होंने बाल दिवस पर बौद्ध सर्किट लाली पहाड़ी दर्शन के दौरान नाथ पब्लिक स्कूल के बच्चों एवं शिक्षकों से बातचीत की. बच्चों ने भूटानी बौद्धिष्ट से प्रभावित होकर उनसे मुलाकात की. अपनी संस्कृति से अवगत करा उनका अभिवादन भी किया. लखीसराय जिला प्रशासन ने गुरुवार को बाल दिवस के अवसर पर लखीसराय के तीन रूपहले पर्दे संग्रहालय, राज सिनेमा और महादेव टॉकिज सिनेमा हॉल में सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए तारे जमीं पे सहित कई लघु फिल्में निशुल्क देखने का अवसर प्रदान किया है. सिनेमा घरों में सीटें कम पड़ने से नाराज बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत दर्शन के लिए बौद्ध सर्किट लाली पहाड़ी पहुंच गये. इस प्रतिनिधि के पूछे जाने पर बच्चों ने बताया कि आज तारें जमीं पे फिल्म देखना था, मौका नहीं मिला तो चले आये अपनी सांस्कृतिक विरासत की सरजमीं देखने. भूटानी बौद्धिष्ट पेमा डोरजी एवं सचिन केरला ने बच्चों से अंग्रेजी में बातचीत की. उन्होंने बताया कि बिहार की धरती भगवान बौद्ध का रहा है. यहां बौद्ध की अनगिनत किला है, मूर्तियां दबी है, बड़े स्तरों पर गहराई से इसकी खुदाई और संरक्षण की जरूरत है. पेमा डोरजी ने लाली पहाड़ी को नमन किया, इसके बाद इतिहासकार अशोक कुमार सिंह ने उनकी बातों को हिंदी अनुवाद कर बताया. ——————————————————————————-

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