सूर्यगढ़ा पीएचसी में नहीं है महिला डॉक्टर

Published at :12 Dec 2015 6:38 PM (IST)
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सूर्यगढ़ा पीएचसी में नहीं है महिला डॉक्टर

सूर्यगढ़ा पीएचसी में नहीं है महिला डॉक्टर फोटो संख्या:01चित्र परिचय-सूर्यगढ़ा पीएचसी में महिला मरीजफोटो संख्या:02चित्र परिचय-सूर्यगढ़ा पीएचसी का नव निर्मित भवनफोटो संख्या:08-रवि शेकर सिंह अशोकफोटो संख्या:09-प्रभाकर सिंहफोटो संख्या:10-सुमन कुमारफोटो संख्या:11-विमल वर्माप्रतिनिधि, मेदनीचौकीसूर्यगढ़ा पीएचसी में वर्षों से कोई महिला चिकित्सक नहीं है. पुरुष चिकित्सक ही महिला रोगियों की इलाज या आपरेशन करते हैं. हर रोज दर्जनों […]

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सूर्यगढ़ा पीएचसी में नहीं है महिला डॉक्टर फोटो संख्या:01चित्र परिचय-सूर्यगढ़ा पीएचसी में महिला मरीजफोटो संख्या:02चित्र परिचय-सूर्यगढ़ा पीएचसी का नव निर्मित भवनफोटो संख्या:08-रवि शेकर सिंह अशोकफोटो संख्या:09-प्रभाकर सिंहफोटो संख्या:10-सुमन कुमारफोटो संख्या:11-विमल वर्माप्रतिनिधि, मेदनीचौकीसूर्यगढ़ा पीएचसी में वर्षों से कोई महिला चिकित्सक नहीं है. पुरुष चिकित्सक ही महिला रोगियों की इलाज या आपरेशन करते हैं. हर रोज दर्जनों महिलाएं अपना इलाज के लिये पीएचसी आती हैं. जहां महिला चिकित्सक नहीं होने की वजह से उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है. झिझक व संकोच के कारण वे पुरुष चिकित्सक से खुलकर कुछ बोल नहीं सकती. जिसकी वजह से उनका सही तरीके से इलाज नहीं हो पाता. स्थानीय लोगों के द्वारा कई बार सूबे के स्वास्थ्य मंत्री, क्षेत्रीय सांसद व विधायक से पीएचसी में महिला चिकित्सक पदस्थापित करने की मांग की गयी. लेकिन अब तक नतीजा शून्य निकला. वर्तमान में यहां स्थायी रूप से नियुक्त दो चिकित्सकों के अलावे संविदा पर एक चिकित्सक कार्यरत हैं. वहीं एक डेंटिस्ट कार्यरत हैं. ड्रेसर व फार्मासिस्ट की संख्या एक-एक है. पीएचसी में दो एएनएम कार्यरत हैं. 30 शय्या वाले इस पीएचसी में अचानक रोगियों की संख्या बढ़ने पर उन्हें फर्श पर ही रहना पड़ता है. बंध्याकरण के दिन यह कुव्यवस्था देखी जा सकती है. कहते हैं लोगरोगी कल्याण समिति के सदस्य सह सामाजिक कार्यकर्ता प्रभाकर सिंह के मुताबिक पीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है. इलाज के दौरान महिला रोगी संकोच का अनुभव करती हैं. स्थानीय चेंबर के अध्यक्ष सह रोगी कल्याण समिति के सदस्य रवि शंकर सिंह अशोक के मुताबिक कई बार इस ओर मंत्री सहित क्षेत्रीय सांसद व विधायक का ध्यान आकर्षित किया गया लेकिन स्थिति नहीं बदली. दवा व्यवसायी सुमन कुमार के मुताबिक महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण प्रसव सहित अन्य कार्यों के लिये महिला मरीजों को काफी परेशानी होती है. विमल वर्मा के मुताबिक कई बार महिला मरीज खुलकर अपनी समस्या पुरुष चिकित्सक के सामने नहीं रख पाती. उन्हें महिला चिकित्सक की सेवा लेने के लिये अन्यत्र जाना पड़ता है. कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारीप्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा सत्येंद्र कुमार के मुताबिक उपलब्ध संसाधन से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है. रोगियों को पीएचसी स्तर की सारी सुविधाएं दी जा रही है.

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