आधा किमी दूर से लाते हैं पानी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Apr 2015 12:30 PM
क्षेत्र के पांच गांव चंपानगर, मंङिायावां, नवकाडीह, बसुहार व उरैन में गरमियों के मौसम में पानी की किल्लत हो जाती है. इन गांवों के मवेशी पालक अपने मवेशियों को लेकर मुंगेर के फरकिया गंगा किनारे चले जाते हैं. वहीं आम लोगों को शुद्ध पेयजल का किल्लत बनी रहती है. इन दिनों ताल-तलैया पूरी तरह सूख […]
क्षेत्र के पांच गांव चंपानगर, मंङिायावां, नवकाडीह, बसुहार व उरैन में गरमियों के मौसम में पानी की किल्लत हो जाती है. इन गांवों के मवेशी पालक अपने मवेशियों को लेकर मुंगेर के फरकिया गंगा किनारे चले जाते हैं. वहीं आम लोगों को शुद्ध पेयजल का किल्लत बनी रहती है. इन दिनों ताल-तलैया पूरी तरह सूख जाते हैं. कुएं व चापाकल में भी पानी का स्तर नीचे चले जाने के कारण गंदा पानी निकलने लगता है.
कजरा : उरैन ग्राम निवासी मो नियाज कहते हैं, उनके टोले के जफीर मियां के पास करीब पांच वर्ष पूर्व गाड़ा गया चापाकल खराब पड़ा है. इसकी मरम्मती नहीं करवायी जा रही है. उरैन मसजिद के पास विभाग द्वारा बोरिंग सह जलमीनार का निर्माण अधूरा है. करीब 600 फीट खुदाई के बाद पानी नहीं मिलने से योजना वर्षो से खटाई में पड़ी है. जबकि नवकाडीह निवासी विजय सिंह, पंच निरंजन सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा चापाकल मरम्मती के लिए आये मिस्त्री लोगों से एक हजार रुपये मांगते हैं. नहीं देने पर चापाकल ठीक नहीं करते. वहीं उसी गांव के मृत्युंजय पासवान, सुधीर व पंकज पासवान ने बताया कि नवकाडीह गांव की जनसंख्या करीब 6 हजार की है. यहां 6 में से चार चापाकल खराब पड़ा है.
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