वृद्धा पेंशन में बढ़ोत्तरी किये जाने की मांग

Published at :26 Oct 2015 5:27 AM (IST)
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वृद्धा पेंशन में बढ़ोत्तरी किये जाने की मांग

पोठिया : सरकार के मुलाजिम व राजनेताओं के वेतन व भत्ता तो समय-समय पर वृद्धि कर दी जाती है पर बुजुर्गों को कोई सुनने वाला ही नहीं है. उन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी दिया जाता है तो मात्र तीन से चार सौ रुपये. इसके बाद भी राशि को पाने के लिए कार्यालय का चक्कर काटना […]

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पोठिया : सरकार के मुलाजिम व राजनेताओं के वेतन व भत्ता तो समय-समय पर वृद्धि कर दी जाती है पर बुजुर्गों को कोई सुनने वाला ही नहीं है. उन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी दिया जाता है तो मात्र तीन से चार सौ रुपये. इसके बाद भी राशि को पाने के लिए कार्यालय का चक्कर काटना इनकी नियति बन गयी है.

वर्ष में यदि उन्हें तीन से पांच हजार भी पेंशन के रूप में राशि मिलती भी है, तो बिचौलियों की नजर से नहीं बचता. ऐसे बुजुर्गों की आवाज उठाने वाले कोई जनप्रतिनिधि या सरकार की ध्यान नहीं है.

कहा जाता है कि बुढ़ापा इंसान का दूसरा बचपन होता है. इस दूसरे बचपन में शारीरिक देखभाल से ज्यादा उसे मानसिक देखभाल की आवश्यकता होती है. अपना गुजारा स्वयं कर सकने के लिए विवश वृद्ध कभी चिलचिलाती धूप में सड़कों पर रिक्शा चलाते नजर आते है तो कभी ठिठुरते सर्दी में बोझ ढोते.
सामाजिक सहायता के अभाव में बेटे बेटियां पर आश्रित होने के अलावे उनके पास कोई चारा नहीं है. भारत में वृद्धों के लिए बहुत कुछ किया जाना है. बावजूद इसके सरकार द्वारा स्थापित सामाजिक सुरक्षा योजना सरजमीं पर नहीं उतर कर बिचौलियों की भेंट चढ़ रहा है.
इधर बीडीओ संदीप कुमार पांडे ने बताया कि ओएपी 80 वर्ष से ऊपर 668 लाभुक, ओएपी 60-79 वर्ष के 10753 लाभुक, विडो पेंशन में 115 लाभुक, बीडीएच पेंशन के 2084 लाभुक तथसा एसएस पेंशन योजना में कुल 35 यानी की 17032 कुल लाभुक है. पर जानकारों की माने तो एक ही व्यक्ति अलग-अलग योजना का लाभ, फर्जी बीपीएल कार्ड बना कर योजना का लाभ लेना और गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले व्यक्ति इस सामाजिक सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित रहने के कारण ही बुजुर्गों द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव में अपने दर्द का बयां करेंगे.
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