लोगों को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल

Published at :16 Oct 2015 2:56 AM (IST)
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लोगों को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल

दिघलबैंक(किशनगंज) : कालापानी के नाम से बदनाम जिले के दिघलबैंक प्रखंड की स्थिति आजादी के 67 साल बाद आज भी जस की तस है. प्रखंड के कई इलाके के वासिंदे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से प्रखंड के बलुआडांगी, पलस, डाकुपाड़ा, मंदिर […]

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दिघलबैंक(किशनगंज) : कालापानी के नाम से बदनाम जिले के दिघलबैंक प्रखंड की स्थिति आजादी के 67 साल बाद आज भी जस की तस है. प्रखंड के कई इलाके के वासिंदे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.

अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से प्रखंड के बलुआडांगी, पलस, डाकुपाड़ा, मंदिर टोला आदि ग्राम के लोगों ने विधान सभा चुनाव के दौरान वोट बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके के राजनीतिज्ञों को उनकी सुध सिर्फ चुनाव के वक्त आती है.

चुनाव के दौरान विभिन्न दलों के नेता भोले भाले ग्रामीणों को आश्वासन की छुट्टी पिलाते है लेकिन चुनाव खत्म् होते ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ साथ सांसद, विधायक भी कभी इन गांव की ओर अपना रूख करना मुनासिब नहीं समझते है. खास्ता हाल व जर्जर सड़क के रास्ते जैसे तैसे पलसा घाट तक पहुंचने के बाद टीम की सवारी में ब्रेक लग गया.

नाव पर पार करने को विवश ग्रामीण
सामने कनकई नदी विकराल रूप धारण किये हुए थी जान जोखिम मंे डाल कर उपर वाले का नाम लेकर नाव पर चढ़ा कुछ दूर गया फिर ग्रामीणों द्वारा बनाये गये चचरी पुल के सहारे जैसे उस पार गया.
जबकि ग्रामीण व स्कूली बच्चे सहित सीमा की सुरक्षा में तैनात एसएसबी जवान रोज इसी नाव से होकर आने जाने केा विवश है. बच्चे अपने घरों से पांच किमी की दूरी पर स्थित विद्यालय शिक्षा ग्रहण करते जाते है. वहीं साथ ही चल रहे ग्रामीण ने बताया कि 8वीं तक की शिक्षा तो 5 किमी की दूरी पर उपलब्ध है
परंतु आगे की शिक्षा के लिए इन बच्चों को 10 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी. नतीजतन इनमें से कई बच्चे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने को बाध्य हो जायेगा.
प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को खटिया पर लाद कर स्वास्थ्य केंद्र ले जोन को विवश है.
ग्रामीणों ने बताया कि नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र टप्पू भी लगभग 13 किमी दूर होने के कारण अक्सर इलाके के मरीज स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते और नदी पार करने में ही दम तोड़ देते है. वहीं कनकई नदी पार करने के पश्चात नदी किनारे की जमीन में दम तोड़ देते है.
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