पीले पड़ने लगे धान के पौधे

Published at :05 Aug 2015 4:29 AM (IST)
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पीले पड़ने लगे धान के पौधे

किशनगंज :अब तक सामान्य से बहुत कम बारिश का सीधा असर धान की फसलों पर पड़ा है. बारिश नहीं होने से धान की खेतों में दरार पड़ने लगे हैं. किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हुए हैं. मौसम विभाग के अनुसार किशनगंज जिले में सूखे की आशंका 70 प्रतिशत बढ़ गयी है. जुलाई से मॉनसून […]

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किशनगंज :अब तक सामान्य से बहुत कम बारिश का सीधा असर धान की फसलों पर पड़ा है. बारिश नहीं होने से धान की खेतों में दरार पड़ने लगे हैं. किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये हुए हैं. मौसम विभाग के अनुसार किशनगंज जिले में सूखे की आशंका 70 प्रतिशत बढ़ गयी है. जुलाई से मॉनसून की कृपा बरसने की उम्मीद देख रहे किसान अब नाउम्मीद हो गये हैं. मॉनसून कमजोर रहने से धान उत्पादन में काफी कमी आयेगी.

कुर्लीकोट प्रतिनिधि के अनुसार, धान की खेत में दरार पड़ रही है. हालात यह है कि जिन किसानों ने किसी तरह धान की रोपनी कर ली थी पटवन के लिए परेशान हैं. पिछले एक पखवारे से बरसात नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसानों चिंतित हैं. पंपिंग सेट के जरिये किसान किसी तरह पटवन कर रहे हैं. लेकिन सूर्य की तपिश इतनी तेज है कि किसानों के सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. इस मामले में दल्लेगांव पंचायत के मुखिया सईदुर्रहमान, मो जिलानी, जिरनगच्छ के रईस कैसर, कनकपुर पंचायत के मुकरी बस्ती गांव के किसान मो हफाजुद्दीन, फरीद आलम, तफीक आलम आदि ने बताया कि यदि जल्द बरसात न हुई तो इलाके में सूखा पड़ना निश्चित है. प्रखंड प्रमुख सोगरा नाहिद ने जिला प्रशासन से डीजल अनुदान की राशि जल्द वितरण करने की मांग की है.
ठाकुरगंज प्रतिनिधि के अनुसार, खेतों में पानी नहीं रहने के कारण दरार पड़ने लग गयी है. खास कर गरीब किसानों के हालात बेहद खराब हैं, क्योंकि जिनके पास पूंजी नहीं है वैसे किसानों का एक मात्र आसरा वर्षा ही है. इस संबंध में कृषक नसीम अख्तर ने कहा कि समय पर बदरा ने धोखा दे दिया है. खरीफ फसल को नुकसान पहुंच रहा है. बिचड़े सूख रहे हैं. कृषक हबेबुर्रहमान, मो अशफाक, मो नसीम व अन्य ने कहा कि लंबे समय से बारिश का नहीं होना किसानों के लिए चिंता का विषय है. तपती धूप से सुखाड़ जैसा नजारा है. गरीब किसान खेती के लिए समय रहते डीजल अनुदान की राशि से वंचित रहता है. जिस कारण वह खेतों को ऐसे हालातों में सींच नहीं पाता है. मुश्किल से तीस से चालीस फीसदी रोपनी हो सकी है. वह भी वर्षा के अभाव में जलने लगा है. खाद विक्रेता गौरव दत्ता ने कहा कि हालात बेहद खराब है. खाद की बिक्री घट गयी है. खरीद मूल्यों में किसानों को खाद बेच देना पड़ रहा है.
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