दिघलबैंक का पलसा गांव : आज भी चचरी पुल ही है आवागमन का सहारा

Published at :27 Mar 2015 8:53 AM (IST)
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दिघलबैंक का पलसा गांव : आज भी चचरी पुल ही है आवागमन का सहारा

दिघलबैंक (किशनगंज): दिघलबैंक प्रखंड की स्थिति आज भी जस की तस है. प्रखंड के कई इलाके के वांसिदे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से दिघलबैंक प्रखंड के बलुवाडांगी, पलसा, डाको पाड़ा, मंदिर टोला आदि गांव के लोग पुल व सड़क निर्माण की […]

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दिघलबैंक (किशनगंज): दिघलबैंक प्रखंड की स्थिति आज भी जस की तस है. प्रखंड के कई इलाके के वांसिदे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. अपनी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से दिघलबैंक प्रखंड के बलुवाडांगी, पलसा, डाको पाड़ा, मंदिर टोला आदि गांव के लोग पुल व सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं.

ग्रामीणों का आरोप इलाके के राजनीतिज्ञों को उनकी सुधि सिर्फ चुनाव के वक्त आती है. चुनाव के दौरान विभिन्न दलों के नेता भोले भाले ग्रामीणों को आश्वासन की घुट्टी पिलाते हैं.

चुनाव खत्म होते ही प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ सांसद, विधायक भी कभी इन गांव की ओर अपना रूख करना मुनासिब नहीं समझते है. प्रभात खबर की टीम ने जब इन गांवों का दौरा किया तो उनकी व्यथा शत प्रतिशत सच नजर आयी. खास्ता हाल व जजर्र सड़क के रास्ते जैसे तैसे पलासा गांव तक पहुंचने के बाद आगे चचरी पुल ही एकमात्र सहारा था. सामने कनकई नदी विकराल रूप धारण किये हुए थी. ग्रामीण चचरी पुल के सहारे जैसे-तैसे जान हथेली पर रख कर आवागमन करते हैं. स्कूली बच्चे भी रोज इसी चचरी पुल से होकर आने-जाने को विवश हैं.

कनकई नदी के कहर से सैकड़ों एकड़ उपजाउ भूमि नदी के गर्भ में समा गयी है. ग्रामीणों ने कहा कि इस पानी से लगातार तीन दिनों तक कपड़ा साफ करने के बाद सफेद कपड़ा का रंग बदल कर पीला हो जायेगा. ग्रामीणों का कहना था कि बिजली विहीन इस गांव में ढीबरी के लौ के सहारे रात काटने को विवश है, परंतु थाना, प्रखंड कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, बाजार आदि के कनकई नदी के पार होने के कारण उन्हें जोखिम उठाना ही पड़ता है. ग्रामीण श्याम नाथ सिंह, भदर लाल सिंह, कैशर आलम, कमरुल होदा, दसमत सोरेन,चोटी मंडल, सत्य नारायण सिंह, चरित्र सिंह,सुरेंद्र सिंह, श्रवण सिंह, मदन मोहन सिंह, हरि लाल सिंह, दिगंबर सिंह, जगत नारायण सिंह, विजेंद्र सिंह आदि एक स्वर में पुल, बिजली व सड़क सुविधा की मांग कर रहे थे.

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