मां की पूजा से मिलेगी शांति व समृद्धि

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शारदीय नवरात्र शुरू बिशौनी में होती है आदि शक्ति की पूजा/ साग एवं बगिया का लगता है भोग परबत्ता. प्रखंड में शारदीय नवरात्र के आगमन की आहत के साथ ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गयी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में चार नवरात्र हैं. चैत्र शुक्ल में प्रथम नवरात्र होता है इसे वासंती नवरात्र […]

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शारदीय नवरात्र शुरू

बिशौनी में होती है आदि शक्ति की पूजा/ साग एवं बगिया का लगता है भोग

परबत्ता. प्रखंड में शारदीय नवरात्र के आगमन की आहत के साथ ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गयी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में चार नवरात्र हैं.

चैत्र शुक्ल में प्रथम नवरात्र होता है इसे वासंती नवरात्र कहा जाता है. आषाढ़ शुक्ल में गुप्त नवरात्र होती है. आश्विन मास में प्रमुख नवरात्र होती है. इसे शारदीय नवरात्र के रुप में जाना जाता है. माघ शुक्ल मे ंपुन: गुप्त नवरात्र होता है. आदिकाल से ही विश्व में किसी न किसी रुप में शक्ति की उपासना का प्रचलन रहा है. प्रखंड में शक्ति की उपासना के लिए तैयारियां शुरू हो गयी है. गंगा के द्वारा विस्थापित होकर भी पुन: गंगा की गोद में स्थित प्रखंड के लगार पंचायत अंतर्गत बिशौनी गांव में अवस्थित चार भुजाधारी अर्थात चतुभरुज आदि शक्ति स्वरुपा की पूजा का एक विशेष महत्व है. गांव तथा इलाके के लोग सैकड़ों वर्षो से मां के इस रूप की पूजा करते चले आ रहे हैं. गांव के बुजुर्ग सत्यनारायण मिश्र, विद्यापति झा, धनंजय झा एवं उमेश चंद झा बताते हैं कि बिशौनी गांव को कई बार गंगा कटाव से पीड़ित होकर विस्थापित होने का कष्ट ङोलना पड़ा. इसके बावजूद गांव के लोगों ने यथाशक्ति मां की पूजा को जारी रखा. एक बार भीषण बाढ़ आयी तथा मंदिर के भीतर भी काफी पानी जमा हो गया. गांव के लोग चिंतित हो गये कि अब प्रतिमा कहां स्थापित होगी और पूजा कैसे होगी.

नवरात्र शुरु होने से एक दिन पूर्व मंदिर से पानी निकल गया और पूजा आरंभ हो गयी. गंगा कटाव से हो रहे आर्थिक नुकसान के कारण गांव वालों ने निर्णय लिया कि अब अगले वर्ष से मां की पूजा संभव नहीं है. पूजा समापन के बाद मां की प्रतिमा के विसजर्न के साथ ही मेढ़ को भी गंगा में प्रवाहित कर दिया गया. कहा जाता है कि कई दिनों बाद मां भगवती ने गांव के लोगों को स्वपA में कहा कि इस गांव की पूजा से मैं प्रसन्न हूं मेरी पूजा इसी गांव में होनी चाहिए. तुम अपने घरों में जो भोजन ग्रहण करते हो उसी से मेरा भोग लगाओ और पूजा करो. उस दिन से गांव के लोग साग और चावल की बगिया का भोग लगा कर पूजा करते हैं जो आज भी जारी है. बाहरी लोगों को यह सुनने में कुछ अटपटा लग सकता है कि मां को साग बगिया का भोग लगाया जाता है. ग्रामीण मनोज मिश्र, प्रवीण गौतम, कुमुद झा, अविनाश मिश्र, सिंधू मिश्र, रिंकू झा, रजनीकांत मिश्र, अनुपम मिश्र ने बताया कि मां की पूजा से सुख शांति एवं समृद्धि आती है ऐसा हमारा दृढ़ विश्वास है.

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