एनएच-95 का निर्माण अधर में
खगड़िया: धमारा घाट स्टेशन पर रेल हादसे में मारे गये 28 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन, यह बात भले ही जांच के पचड़े में फस कर रही गयी हो. लेकिन इतना तो तय है कि अगर इस दुर्गम क्षेत्र में सड़क होती, तो इतना बड़ा रेल हादसा नहीं होता. जानकारी के मुताबिक सहरसा जिले […]
खगड़िया: धमारा घाट स्टेशन पर रेल हादसे में मारे गये 28 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन, यह बात भले ही जांच के पचड़े में फस कर रही गयी हो. लेकिन इतना तो तय है कि अगर इस दुर्गम क्षेत्र में सड़क होती, तो इतना बड़ा रेल हादसा नहीं होता. जानकारी के मुताबिक सहरसा जिले के माठा ढाला चौक से खगड़िया जिले के मानसी प्रखंड तक बनने वाली (28 किमी) सड़क निर्माण को लेकर सभी आवश्यक प्रक्रियाएं वर्ष 2011 में ही राज्य सरकार ने पूरी कर ली थी. तब राज्य सरकार व रेल मंत्रलय के बीच तालमेल का अभाव था. बार-बार एनओसी मांगे जाने पर भी तब रेल मंत्रलय ने एनओसी नहीं दिया था, जिस कारण वर्ष 2013 तक सड़क नहीं बन पायी. यह एनओसी छोटी रेल लाइन पर बने पुल पर सड़क बनाये जाने के लिए मांगी जा रही थी.
उठ रही सड़क की मांग
सहरसा व खगड़िया जिले के सीमा क्षेत्र के धमारा, बदला, कोपड़िया में सड़क निर्माण की मांग विस में तत्कालीन विधायक सह वर्तमान सांसद दिनेशचंद्र यादव ने 20 मार्च 2007 को उठाया था. तब सरकार ने कहा था कि संबंधित विभाग, रेल मंत्रलय, ग्राम अभियंत्रण संगठन व जिला परिषद से एनओसी प्राप्त कर अधिग्रहण करने व उक्त पथ के उन्नयन का विचार सरकार रखती है. इसके लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश भी दिया गया था. श्री यादव ने 17 अप्रैल 2007 को फिर इस ओर सरकार का ध्यान खींचा था. वर्ष 2007 में वर्तमान सांसद व विस सदस्य रामचरत्रि प्रसाद सिंह, गुंजेश्वर साह, रमेश ऋषिदेव व रामेश्वर प्रसाद यादव ने इस सड़क के लिए आवाज उठायी थी. तब सरकार ने जवाब दिया था कि निविदा की प्रक्रिया पूरी कर इस पथांश को 2008 से 2009 के बीच कराया जायेगा.
हुई थी अधिसूचना जारी
सहरसा जिला के डीएम ने 17 अप्रैल 2007 को एनओसी प्राप्त होते ही राज्य सरकार के आरसीडी ने अधिसूचना जारी कर माठा ढ़ाला चौक से धनछड़ (8 किमी) तक संबंधित प्रमंडल के एइ को प्रभार प्राप्त करने का निर्देश 13 जून 2007 को दिया था.
मिली थी प्रशासनिक स्वीकृति
सहरसा पथ प्रमंडल अंतर्गत माठा ढ़ाला चौक से मानसी भाया कोपड़िया, धनछड़ पथ में उच्चस्तरीय पुल निर्माण सहित चौड़ीकरण व मजबूतीकरण के लिए पथ निर्माण विभाग ने 7 अक्तूबर 2009 को 1837.36 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी.
जिप ने भी दिया एनओसी
खगड़िया जिला परिषद ने भी वर्ष 2007 में सड़क निर्माण के लिए एनओसी दे दिया था. डीडीस सह जिप के मुख्य एइ ने पत्र संख्या 196 दिनांक 1 अक्तूबर 2007 को ही अधिग्रहण हेतु एसओसी विभाग को भेज दिया था. उधर, सहरसा माठा ढाला से मानसी के बीच के नदी व उसके उपधारा पर चार पुल बनने थे. जिसमें मुख्य कोसी नदी पर 1000 मीटर, डंड कोसी पर 450 मीटर, कमला पर 300 मीटर, बागमती पर 500 मीटर लंबी पुल बननी थी. इसके लिए निगम के प्रबंध निदेशक एके झा ने 205. 50 करोड़ की मांग पथ निर्माण विभाग से की थी. इस बीच स्थानीय सांसद श्री यादव पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव से लगातार पथ निर्माण को लेकर पत्रचार करते रहे. अंत में आरसीडी ने अधिसूचना जारी कर पथ को एसएच का दर्जा देते हुए एनएच-95 नाम दिया.
कहते हैं सांसद
सांसद दिनेश चंद्र यादव ने बताया कि अब उक्त सड़क निर्माण की रेलवे की कोई भूमिका नहीं रह गयी है. सीएम के प्रयास से उक्त एसएच का 800 करोड़ का डीपीआर तैयार किया गया है. चार पुल बनाये जायेंगे, जिस पर 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे. धमारा घाट से सटे नवादा घाट पर भी सड़क निर्माण कार्य का टेंडर हो गया है. इसका निर्माण 13 करोड़ रुपये की लागत से किया जायेगा.
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