असहयोग आंदोलन के दौरान गोगरी पधारे थे बापू
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Jan 2015 10:04 PM
-आश्रम का खंडहर दिलाता रहता है राष्ट्रपिता की याद-भारत भ्रमण के दौरान मुंगेर से गंगा पार कर पहले सरमा क्षेत्र झौआबहियार में रुके थे महात्मा गांधीप्रतिनिधि, गोगरीक्षेत्र के दक्षिणी जमालपुर पंचायत अंतर्गत स्थित आश्रम की चर्चा होते ही लोगों के जेहन में बरबस ही बापू की छवि आ जाती है. 1920 के दशक में बापू […]
-आश्रम का खंडहर दिलाता रहता है राष्ट्रपिता की याद-भारत भ्रमण के दौरान मुंगेर से गंगा पार कर पहले सरमा क्षेत्र झौआबहियार में रुके थे महात्मा गांधीप्रतिनिधि, गोगरीक्षेत्र के दक्षिणी जमालपुर पंचायत अंतर्गत स्थित आश्रम की चर्चा होते ही लोगों के जेहन में बरबस ही बापू की छवि आ जाती है. 1920 के दशक में बापू ने वर्तमान के राष्ट्रीय इंटर स्कूल के प्रांगण में आश्रम का उदघाटन किया था. असहयोग आंदोलन के दौरान भारत भ्रमण के दौरान मुंगेर से गंगा पार कर पहले सरमा क्षेत्र झौआबहियार में रुके, जहां लोगों को आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया. उसके बाद वहां से पैदल यात्रा करते हुए गोगरी पहुंचे और आश्रम में रात गुजारी. असहयोग आंदोलन के अलख जगाते हुए यहां से आगे की यात्रा की. गांधी द्वारा स्थापित आश्रम आज मुहल्ले के रूप में परिवर्तित हो गयी है. हालांकि वर्षों पूर्व आश्रम के भवन में गांधी प्राथमिक विद्यालय संचालित थी. इसे बाद दूसरे विद्यालय में समायोजित कर दिया गया. वर्तमान में आश्रम प्रांगण क्षेत्र में राष्ट्रीय इंटर विद्यालय संचालित है. स्वतंत्रता सेनानी मुरली मनोहर प्रसाद उस दिन को याद करते हुए कहते हैं कि जब बापू गोगरी पधारे थे, उनके साथ लोगों की हुजूम देखते ही बन रहा था. जो झौआ बहियार दियारा से लेकर आश्रम तक साथ साथ पहुंची थी. उनके अनुसार गांधी जी के बाद में स्थापित गांधी विद्यालय विभागीय स्तर पर हटा लिया जाना उचित कदम नहीं था.
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