मरम्मत नहीं हुई जीएन बांध, फिर करना होगा मशक्कत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Dec 2014 10:02 PM
गोगरी. बीते वर्ष बाढ़ के समय जिस तरह जीएन बांध को बचाने को लेकर हाय तौबा प्रशासन में मची रही, वही हाय तौबा कहीं इस वर्ष भी नहीं बनी रह जाये. इसका कारण बांध का मरम्मत नहीं होना है. उल्लेखनीय है कि महेशखंूट बन्नी से नारायणपुर तक 60 के दशक में बने लगभग 52 किलोमीटर […]
गोगरी. बीते वर्ष बाढ़ के समय जिस तरह जीएन बांध को बचाने को लेकर हाय तौबा प्रशासन में मची रही, वही हाय तौबा कहीं इस वर्ष भी नहीं बनी रह जाये. इसका कारण बांध का मरम्मत नहीं होना है. उल्लेखनीय है कि महेशखंूट बन्नी से नारायणपुर तक 60 के दशक में बने लगभग 52 किलोमीटर लंबी जीएन बांध काफी पुरानी है. जो जगह-जगह जर्जर है. हालांकी वर्ष 2010-11 में मरम्मत कार्य के तहत बांध पर मिट्टी भड़ायी कार्य करायी गई थी. जो उंट के मुंह में जीरा के समान था. जिस कारण गत वर्ष दर्जनों स्थानों पर बाढ़ के समय सिपेज की समस्या के साथ बांध टूटने का खतरा बन गया था. जिसे लेकर बन्नी, गोगरी, शिशवा नया गांव आदि जगह पर बांध को बचाने के लिए विभाग व प्रशासन को सारी ताकत झोंकनी पड़ी. जबकि लगार में रिंग बांध टूटने के बाद जीएन बांध तो लगभग ध्वस्त ही हो गया. तथा पूरे बाढ़ के दौरान आम लोग बांध की दयनीय स्थिति देख परेशान होते रहे. बाढ़ के जाने के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली थी. वर्तमान में भी उक्त स्थलों के अलावा उसरी,भरतखंड अदि स्थलों पर बांध की जर्जर स्थिति है. जिसे अब तक ठीक नहीं की जा सकी है. स्थानीय लोगों के अनुसार अभी के समय में अगर बांध को मजबूती प्रदान नहीं की जा सका तो बाढ़ के समय कहीं गत वर्ष वाली ही स्थिति उत्पन्न ना हो जाय.
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