अब मजदूरों की बेटियों की शादी के लिए सरकार देगी 50 हजार रुपये

Updated at : 11 May 2018 5:03 AM (IST)
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अब मजदूरों की बेटियों की शादी के लिए सरकार देगी 50 हजार रुपये

बिहार भवन व निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजना के तहत मिलेगी सहायता राशि खगड़िया : श्रमिकों की बेटियों के हाथ पीले कराने के लिए श्रम विभाग जुट गया है. बिहार भवन व निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा श्रमिकों की बेटियों की शादी के लिए 50 -50 हजार रुपये दिये जाने का प्रावधान सरकार ने […]

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बिहार भवन व निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजना के तहत मिलेगी सहायता राशि

खगड़िया : श्रमिकों की बेटियों के हाथ पीले कराने के लिए श्रम विभाग जुट गया है. बिहार भवन व निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा श्रमिकों की बेटियों की शादी के लिए 50 -50 हजार रुपये दिये जाने का प्रावधान सरकार ने किया है. यह राशि श्रम विभाग सीधे लाभ पाने वाले श्रमिकों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेज दिया जायेगा. श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों के लिए राज्य सरकार द्वारा उनकी बेटियों की शादी के लिए उक्त राशि दी जा रही है. सूबे में पहली बार सरकार द्वारा यह राशि देने की योजना शुरू की गयी है. फिलवक्त इस कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू हो गयी है. इस तरह की योजना से गरीब मजदूरों को लाभ मिलेगा.
सभी वर्ग के मजदूरों का होगा निबंधन
प्रखंड श्रम पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि मजदूर किसी भी वर्ग का हो, वह सरकारी नियमानुसार निबंधन श्रम विभाग कराने के लिए अधिकृत है. मजदूर चाहे एपीएल या बीपीएल से आता हो, सबों का निबंधन किये जाने का प्रावधान है. निबंधन के समय परिचय पत्र के साथ आवेदन जमा करना पड़ता है.
असंगठित क्षेत्र को 88 भागों में बांटा
असंगठित क्षेत्र को 88 भागों में बांटा गया है, जिनमें कामगार आते हैं. संगठित क्षेत्र में लिमिटेड कंपनी में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं. सबका अलग-अलग मजदूरी तय किया गया है, लेकिन जिन क्षेत्रों में वे काम करते हैं उन्हें यदि मजदूरी मिल भी जाती है तो जानकारी के अभाव में श्रम विभाग से मिलनेवाली सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं.सबसे अहम बात यह है कि नियोजकों को यहां काम करनेवाले मजदूरों को कम मजदूरी दी जाती है. इनमें महिला मजदूरों की मजदूरी और भी कम है. प्रखंड में ऐसे सैकड़ों दुकान व नियोजक हैं, जहां मजदूरों को कम मजदूरी दी जाती है. महिला श्रम सस्ता होने के कारण नियोजक महिलाओं को भी कई कामों में लगाये हुए हैं. बावजूद इसके श्रम विभाग इन पर नकेल कसने में विफल है.
दो बेटियों को ही लाभ
अगर किसी एक श्रमिक की दो से ज्यादा बेटियां हैं, तो इसका लाभ सभी को नहीं मिल पायेगा. हर श्रमिक को केवल उनकी दो बेटियों की शादी के लिए ही पैसा मिलेगा. दो से ज्यादा बेटियों की संख्या हुई, तो शेष बेटियों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पायेगा. प्रखंड में सैकड़ों निबंधित श्रमिक हैं. नये सिरे से श्रमिक और जुड़ रहे हैं. मजदूरों का निबंधन श्रम संसाधन विभाग द्वारा लगातार किया जा रहा है.
योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जरूरत
बिहार शताब्दी असंगठित कर्मकार दुर्घटना योजना के तहत अस्थाई रूप से आंशिक निशक्त होने पर मजदूरों को 33 हजार 500 रुपये देने का प्रावधान है, जबकि अस्थायी निशक्तता पर 75 हजार रुपये की राशि दी जाती है. वहीं सामान्य मृत्यु पर 30 हजार और दुर्घटना में मृत्यु पर एक लाख की राशि मजदूरों को मिलती है. जानकारी के अभाव में कई मजदूर इन लाभों से वंचित रह जाते हैं.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं मजदूर
प्रखंड की आबादी लगभग तीन लाख से अधिक है. इनमें से कितने मजदूरी करते हैं. इसका आंकड़ा श्रम विभाग के पास नहीं है. श्रम विभाग ने अब तक असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का निबंधन भी सही तरीके से नहीं किया है. विभाग ने कुछ मजदूरों का निबंधन केवल भवन निर्माण कामगार के रूप में किया है, जबकि अब तक संगठित और असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूरों का निबंधन नहीं हो पाया है. ऐसे में मजदूर श्रम विभाग से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हो जाते हैं. विभाग की लापरवाही के कारण शहर में नियोजकों (दुकान मालिक) द्वारा कम मजदूरी पर मजदूरों से काम लिया जाता है.
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