पशु चिकित्सालय में नहीं हैं चिकित्सक

Updated at : 06 May 2018 2:37 AM (IST)
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पशु चिकित्सालय में नहीं हैं चिकित्सक

गोगरी : अनुमंडल क्षेत्र पशुपालन में अव्वल माना जाता है. कभी गोपालन को लेकर गोगरी गौगृह के नाम से विख्यात हुआ करता था. यहां का गोशाला भी 125 वर्ष पुराना है. आज भी यहां की 80 प्रतिशत आबादी पशुपालन पर निर्भर है. हजारों की संख्या में यहां पशुपालन होता है. बावजूद यहां पशु स्वास्थ्य की […]

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गोगरी : अनुमंडल क्षेत्र पशुपालन में अव्वल माना जाता है. कभी गोपालन को लेकर गोगरी गौगृह के नाम से विख्यात हुआ करता था. यहां का गोशाला भी 125 वर्ष पुराना है. आज भी यहां की 80 प्रतिशत आबादी पशुपालन पर निर्भर है. हजारों की संख्या में यहां पशुपालन होता है. बावजूद यहां पशु स्वास्थ्य की उपेक्षा हो रही है. ऐसा नहीं है कि यहां पशु चिकित्सा केंद्र नहीं है.
चिकित्सा केंद्र तो है लेकिन केंद्र पर न तो चिकित्सक हैं और न कर्मी. दवा व अन्य व्यवस्था का भी यही हाल है. स्थिति ऐसी है कि प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी के बूते ही अनुमंडल मुख्यालय स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय के साथ ही प्रखंड के पांच चिकित्सा केंद्रों का संचालन हो रहा है. एक साथ छह पशु चिकित्सा केंद्र पर चिकित्सक का कार्य कर रहे पशु चिकित्सा पदाधिकारी खुद परेशान हैं.जाने पशुचिकित्सा केंद्रों का हाल प्रखंड में गोगरी, महेशखूंट, पकरैल, शेर सहित कुल छह पशुचिकित्सा केंद्र है. इन सभी की स्थिति दयनीय है. मुख्यालय स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय के अलावा किसी केंद्र को अपना भवन तक नहीं है. वहीं, केंद्रों पर कहीं भी न तो चिकित्सक हैं और न ही कर्मी है. वहीं, दवा, गर्भादान व अन्य व्यवस्था का भी अभाव रहता है.अन्य केंद्र की बात छोड़ भी दें तो अनुमंडल मुख्यालय स्थित मुख्य पशु चिकित्सा केंद में भी समस्याओं का अंबार है. प्रथम श्रेणी पशुचिकित्सा केंद्र का दर्जा तो इसे अवश्य मिला है. लेकिन व्यवस्था तृतीय दर्जा का भी नहीं है. यहां भी विगत छह माह से अधिक समय से कोई चिकित्सक पदस्थापित नहीं हैं. यहां भी चिकित्सक का कार्य प्रखंड पशुपालन अधिकारी ही कर रहे हैं. कर्मी के नाम पर मात्र यहां एक रात्रि प्रहरी है. जिसके बूते केंद्र का संचालन होता है. केंद्र पर दवा व अन्य सुविधाओं का भी अभाव है. पशु गर्भाधान केंद्र भी बेकार पड़ा हुआ है.
कहते हैं हैं पशुपालन पदाधिकारी: प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डा. दिनकर कुमार ने बताया कि चिकित्सक व कर्मी के अभाव में परेशानी है. आवश्यकता अनुसार केंद्रों पर चिकित्सीय कार्य करते हैं.
गोगरी. बीते दिनों आयी तेज आंधी और ओलावृष्टि के चलते जिले के कई इलाकों में लहलहाती मक्के और आम की फसलों की बर्बादी हुई. वहीं दूसरी तरफ खेत में सूखती मूंग की फसल में हरियाली लौटती दिखाई पड़ रही है. गौरतलब हो कि तेज आंधी के चलते खेतों में लगे मक्के की फसल बर्बाद हो गयी है. वहीं आम की फसल को ओलावृष्टि ने काफी मात्रा में क्षति पहुंचाई है. ऐसे में अब किसानों की उम्मीद मूंग फसल पर ही टिकी हुई है. जिसे बारिश के होने से नया जीवन मिल गया है. गोरैयाबथान के किसान सुनील यादव, सुधीर यादव, शेरगढ़ के चंदेश्वरी यादव सहित अन्य किसान मायूस हो कहते हैं कि दियारा में उनकी कई एकड़ में लगी मक्के की फसल को आंधी ने तबाह कर दिया है.वहीं सहित किसान ने कहा कि बीते शुक्रवार को आई आंधी, बारिश ओलावृष्टि ने मक्के की फसल के साथ-साथ आम के फसल को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. किसानों का कहना है कि अब मूंग की फसल से ही कुछ उम्मीद है. मालूम हो कोसी में खेती मौसमी जुआ है. अगर मौसम का मिजाज ठीकठाक रहा से फसल अच्छे होते हैं अन्यथा लागत भी निकल पाना मुश्किल हो जाता है.
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