बाट की जगह पत्थर का उपयोग कर ग्राहकों को लगाया जा रहा वाट

Updated at : 27 Apr 2018 6:29 AM (IST)
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बाट की जगह पत्थर का उपयोग कर ग्राहकों को लगाया जा रहा वाट

मापतौल अधिनियम की खुलेआम धज्जी उड़ने से ठगे जा रहे लोग सप्ताह में एक दिन खुलता है जिला मापतौल विभाग का कार्यालय भागलपुर के मापतौल निरीक्षक को मिला है खगड़िया का भी प्रभार खगड़िया : जिले में माप-तौल विभाग तो है, लेकिन यह आइसीयू में है. लिहाजा, धरातल पर इस विभाग का काम कहीं नहीं […]

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मापतौल अधिनियम की खुलेआम धज्जी उड़ने से ठगे जा रहे लोग

सप्ताह में एक दिन खुलता है जिला मापतौल विभाग का कार्यालय
भागलपुर के मापतौल निरीक्षक को मिला है खगड़िया का भी प्रभार
खगड़िया : जिले में माप-तौल विभाग तो है, लेकिन यह आइसीयू में है. लिहाजा, धरातल पर इस विभाग का काम कहीं नहीं दिखता. विभाग द्वारा कभी भी बाटों की जांच नहीं की जाती है. लिहाजा, नकली बाट तो छोड़िये ईंट-पत्थर से तौल कर सामान बेचने का सिलसिला खुलेआम जारी है. नतीजतन, ग्राहकों को रोज वाट लग रहा है. कहा जाता है कि खगड़िया में अधिकांश दुकान से एक किलो सामान मतलब, 800 ग्राम ही होता है. ऐसे में ग्राहकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है. इस विभाग में खगड़िया में एकमात्र मापतौल निरीक्षक अशोक कुमार कार्यरत हैं. इनको भागलपुर के अलावा खगड़िया का प्रभार दिया गया है.
श्री कुमार स्वयं स्वीकार करते हैं सप्ताह में एक दिन खगड़िया में टाइम देते हैं. कर्मचारियों की कमी के कारण मापतौल अधिनियम के अनुपालन में कठिनाई हो रही है. बताया जाता है कि जिस दिन साहब आते हैं उस दिन कार्यालय खुलता है बाकी के दिनों में उनके प्राइवेट बाबू ही काम देखते हैं. हालांकि मापतौल निरीक्षक किसी प्राइवेट गुर्गें के सक्रिय होने से इंकार करते हुए कहते हैं कि जहां से शिकायत मिलती है कार्रवाई में कोई देरी नहीं होती है.
माप-तौल विभाग में कर्मियों का है टोटा
विभाग में जांच के लिए कटती है रसीद
क्या है नियम
नजरें फेरने के लिए नजराने का चलन
खगड़िया में बाट की ईंट-पत्थर का खुलेआम उपयोग हो रहा है. लेकिन विभाग को यह दिखाई नहीं देता हो यह कैसे हो सकता है. कहा जाता है कि विभाग को नजरें फेरने के लिए नजराना की मोटी रकम दिया जाता है. हालांकि मापतौल निरीक्षक ऐसे किसी अवैध उगाही को सिरे से नकार रहे हैं. लेकिन बाजार में दुकानों में दिख रही सच्चाई विभागीय बाबू की झूठ साबित करने के लिये काफी है.
विभाग की लापरवाही का लाभ उठा कर दुकानदार अपने बाटों में छेड़छाड़ करते हैं तथा उसका वजन घटा देते हैं. कई तरह से बांटों में छेड़छाड़ की जाती है. बांटों की जांच नहीं होने से उपभोक्ताओं की जेब कट रही है. विभाग मौन है. दुकानदार कम वजन देकर जेब काट रहे हैं. दुकानदार बाटों को घिस कर उसका वजन घटाते हैं, वहीं बाटों में लगे रांगे को निकाल कर उसका वजन घटाते हैं. माप-तौल विभाग की लापरवाही एवं निष्क्रियता के कारण आज भी कई दुकानदार प्रमाणित बाट की जगह ईंट एवं पत्थर का उपयोग सामान को तौलने में कर रहे हैं. कई सब्जी की दुकानों सहित अन्य जगहों पर इस तरह के बांटों का उपयोग किया जा रहा है. दुकानदारों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक बाटों में भी छेड़छाड़ की जाती है तथा उसे गलत ढंग से कम वजन पर सेट कर दिया जाता है.
मापतौल विभाग मतलब सब कुछ मैनेज है. खगड़िया में यह कार्यालय सप्ताह में एक दिन खुलता है. बाकी दिन प्राइवेट गुर्गें मापतौल विभाग को चलाते हैं.
रामविलास, दुकानदार, तेतराबाद चंद्रपुरा.
यह सच है कि कर्मचारियों की कमी के कारण खगड़िया में मापतौल अधिनियम का पालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है. भागलपुर के अलावा खगड़िया के भी प्रभार में हैं. सप्ताह में एक दिन खगड़िया जाते हैं. मेरे अलावा कार्यालय में कोई कर्मी नहीं है. एक बाहरी व्यक्ति पंकज कुमार है. जिस दिन हम खगड़िया पहुंचते हैं उसी दिन पंकज कार्यालय आता है. बाकी दिनों में वह कार्यालय नहीं आता-जाता है. अगर कहीं से बाट में गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो तुरंत कार्रवाई की जायेगी. मापतौल विभाग के नाम पर दलाली करने वालों पर कार्रवाई की जायेगी.
अशोक कुमार, प्रभारी मापतौल निरीक्षक.
बाजार में बाट की जगह पत्थर या ईंट से तौल कर सामान देने का विरोध करने पर दुकानदार का सीधा जवाब होता है … यहां यही बाट चलता है. बाजार में चाहे मछली दुकान हो या फिर सब्जी दुकान या किराना स्टोर अधिकांश दुकानों में मापतौल अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है.
संजय कुमार, स्थानीय लोग.
लगभग सभी दुकानों पर यही स्थिति है. मापतौल विभाग इस जिले में है भी या नहीं, पता नहीं चलता. सड़क किनारे खुलेआम बाट की जगह ईंट-पत्थर का प्रयोग हो रहा है. लोग ठगे जा रहे हैं लेकिन विभागीय कर्मी को जांच की फुरसत नहीं मिलती है. फिलहाल, खगड़िया के अधिकांश दुकानों में एक किलो सामान का वजन 800 ग्राम तक ही होता है.
गोपाल कुमार, मालगोदाम रोड
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