एनएच-319 से सियापोखर तक रात के अंधेरे में किया जा रहा दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास का निर्माण 70 लाख 34 हजार की लागत से बन रही दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास सड़क 13 किमी बाइपास का निर्माण अभी टेल तक पहुंचा भी नहीं और उभरने लगे गड्ढे # स्कूटिव इंजीनियर बोले-ठंड व रात में सड़क का कालीकरण करना नियम के विरुद्ध # प्रभात एक्सक्लूसिव # मोहनिया सदर. पसपिपरा के समीप पटना-मोहनिया पथ एनएच-319 से सियापोखर तक दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास का निर्माण दिन के उजाले में नहीं बल्कि रात के अंधेरे में किया जा रहा है, ताकि घटिया सामग्री का उपयोग आसानी से किया जा सके और किया भी गया है, जिसका नतीजा है कि आगे से बनती और पीछे से सड़क उखड़ती जा रही है. जबकि, उक्त पथ का निर्माण कार्य अपने अंतिम लक्ष्य तक अभी पहुंच भी नहीं सका है. पूरब में एनएच 319 से निर्माण शुरु होकर लगभग 13 किलोमीटर पश्चिम में सियापोखर तक होना है, अभी तुलसीपुर के समीप तक ही पथ के कालीकरण का कार्य पहुंचा है और इधर बीच-बीच में उक्त सड़क पर गड्ढे उभरने लगे हैं. 70 लाख 34 हजार की लागत से बन रही दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास का निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गयी. पटना-मोहनिया पथ एनएच 319 से मोहनिया-रामगढ़ पथ एनएच 319ए के लगभग पांच किलोमीटर की दूरी के बीच कुछ जगहों पर उक्त सड़क पर गड्ढे उभरने लगे हैं. इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि उक्त सड़क के निर्माण में किस तरह मानक और पारदर्शिता का चीरहरण किया जा रहा है. तीन वर्ष तक इस पथ पर लोगों ने खाया है हिचकोले वर्ष 2022 में ही उक्त पथ बदहाल होने लगा था. 2023 से जुलाई 2025 तक इस पथ पर वाहन तो क्या पैदल चलना मुश्किल हो गया था. उक्त पथ पर इतने गहरे गड्ढे हो गये थे कि चलने वालों को यह समझ पाना मुश्किल हो गया था कि सड़क पर गड्ढे है या फिर गड्ढे में सड़क है. सबसे बड़ी समस्या तो बरसात के दिनों में लोगों को झेलनी पड़ी है. क्राॅसिंग के क्रम में सड़क किनारे भारी वाहनों के पहिया धंसने से जाम का सामना उक्त पथ से गुजरने वाले सभी लोगों को करना पड़ता था. सड़क किनारे धंसे वाहनों को क्रेन से निकालना पड़ता था. बारिश का समय बीत जाता, तो गर्मी के दिनों में उक्त पथ पर लोगों को धूल भरे गुब्बार का सामना करना पड़ा है. अगस्त 2025 में जब संवेदक द्वारा नहर पथ के निर्माण को लेकर जेसीबी से सड़क को उखाड़ने के बाद गड्ढों को भरवा दिया गया, जिससे लोगों के आवागमन में सुगमता तो हुई लेकिन बारिश का समय समाप्त होते ही वाहनों के परिचालन से उक्त पथ पर जब धूल भरे गुब्बार का उड़ना शुरु हुआ, फिर क्या कहना बाइक, खुली गाड़ी व पैदल चलने वाले लोगों के कपड़ों पर धूल की परत जम जाती थी. अक्तूबर 2025 में जब पसपिपरा एनएच 319 से नहर पथ का निर्माण शुरु हुआ ,तो उक्त पथ से गुजरने वाले लोगों के चेहरे खिल उठे. क्योंकि, राहगीरों को तीन वर्ष तक गहरे गड्ढों में हिचकोले खाने व उड़ते धूल के गुब्बार से मुक्ति मिलने की आस जग उठी. लेकिन किसको पता था कि आगे से बनती और पीछे से सड़क उखड़ती जायेगी. # दोनों आरओबी के बंद होने बढ़ जाता है लोड पटना-मोहनिया पथ एनएच 319 पर घेघिया व मोहनिया-रामगढ़ पथ एनएच 319ए पर डड़वा में बने आरओबी के क्षतिग्रस्त होने पर उक्त दोनों आरओबी पर ओवर हाइट बैरियर लगाकर बड़े व भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिससे पटना से मोहनिया व रामगढ़ होकर उत्तर प्रदेश के लिए आने जाने वाले बड़े वाहनों का आवागमन दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास से होने लगा. भारी वाहनों के भार से उक्त पथ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. हालांकि, लगभग दो वर्ष पूर्व घेघियां आरओबी को ठीक कर दिया गया, लेकिन डड़वा आरओबी आज भी क्षतिग्रस्त है. ऐसी स्थिति में इस नहर पथ का विशेष महत्व है. हालांकि डड़वा दुर्गा मंदिर के समीप बने बाइपास से भी वाहनों का आवागमन होता है. वर्तमान समय में डड़वा बाइपास का निर्माण कार्य चल रहा है. # रात में ही किया गया पथ का कालीकरण जब इस पथ का कालीकरण रात में किया जा रहा था, तो यह समझते रहे कि दिन में वाहनों का परिचालन अधिक होने की वजह से कार्य प्रभावित होगा, इसलिए रात में सड़क का निर्माण कार्य किया जा रहा है. लेकिन नवंबर 2025 में सड़क का कालीकरण शुरु किया गया और दिसंबर में सड़क जगह-जगह उखड़ने लगी. अब लोगों की समझ में आया कि आखिर रात में ही सड़क का कालीकरण क्यों किया गया. दिन के उजाले में वाहनों के आवागमन से निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हो रहा था, बल्कि निर्माण सामग्री में मिलावट कर घटिया कार्य करना संवेदक व इससे जुड़े अधिकारियों की मंशा थी, जो पूरी हो गयी. जबकि, रात व ठंडी के मौसम में किसी भी पथ का कालीकरण करना नियम के प्रतिकूल है. फिर भी अपनी जेब का वजन बढ़ाने के लिए नियमों की अनदेखी की जा रही है. # क्या कहते हैं लोग – अहिनौरा के पूर्व मुखिया अमितेश सिंह कहते है कि दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास के निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है. हमारी पार्टी की सरकार है. जीरो टॉलरेंस की बात कहती है, जो बिल्कुल सही है. लेकिन सरकारी अधिकारी व कर्मचारी पूरी तरह भ्रष्ट हैं, सरकार जमीनी हकीकत नहीं देख पाती है. सड़क का निर्माण पूर्ण होने से पहले उखड़ने लगी. इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या होगा. रात में सड़क का कालीकरण किया गया है. – तुलसीपुर के रहने वाले समाजसेवी सरोज चौबे कहते हैं कि दुर्गावती मुख्य नहर पथ का निर्माण कार्य पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गयी है. रात के समय सड़क को बनाया जा रहा है. अभी टेल तक निर्माण कार्य पहुंचा भी नहीं और जगह-जगह उक्त सड़क पर गड्ढे उभरने लगे हैं. सभी विभाग भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े है. हद हो गयी आगे सड़क बनती जा रही है और पीछे से उखड़ती जा रही है, इसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है. – बघिनी के संदीप सिंह कहते हैं कि हम लोगों के आवागमन का एक ही मुख्य रास्ता है दुर्गावती मुख्य नहर पथ. इसके निर्माण में गजब की अनियमितता बरती जा रही है. रात में सड़क का कालीकरण किया गया है. सड़क आगे से बनती और पीछे से गड्ढों में बदलती जा रही है. कई जगहों पर गड्ढे उभरने लगे हैं. जबकि, इसके निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किया जाना है. सड़क निर्माण के नाम पर दिनदहाड़े लूट हो रही है. शासन व प्रशासन दोनों मौन है. – बघिनी के राकेश कुमार कहते हैं कि दुर्गावती मुख्य नहर बाइपास के निर्माण कार्य पर लाखों रुपये खर्च किया जाना है, लेकिन सड़क सियापोखर तक बनी भी नहीं और पीछे उखड़नी शुरु हो गयी. इस सरकार में पुल गिर रहे है, तो सड़क उखड़ रही है तो आश्चर्य की बात क्या है. सड़क का निर्माण मानक के बिल्कुल विपरीत किया जा रहा है. जबकि, इस पथ से दिन रात वाहनों का परिचालन होता है. रात में सड़क का निर्माण घटिया सामग्री से करने के लिए ही किया जा रहा था. # बोले इंजीनियर इस संबंध में पूछे जाने पर आरडब्ल्यूडी मोहनिया के स्कूटिव इंजीनियर चंदू बैठा ने कहा कि ठंड व रात के समय सड़क का कालीकरण करने का नियम ही नहीं है, ऐसा किया गया है तो पूरी तरह गलत है. हम इसकी जांच करायेंगे. सड़क को उखाड़ कर फिर से संवेदक को सड़क बनाना पड़ेगा. एसडीओ ने रात में कैसे सड़क बनने दिया, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.
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