साल भर बजते बैंड-बाजे, लेकिन सरकारी रेकॉर्ड में 100 की भी नहीं गूंजती शहनाई

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2017 में 37, तो मार्च 2018 तक मात्र चार शादियां ही हुईं रजिस्ट्रार के यहां दर्ज भभुआ सदर : वैसे तो कैमूर जिले में खास कर भभुआ और मोहनिया शहर में साल भर बैंड-बाजे बजते हैं. लेकिन, सरकारी रिकॉर्ड में 100 की भी शहनाई नहीं गूंजती. क्योंकि, किसी भी विवाह का कानूनी प्रमाण माना जाता […]

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2017 में 37, तो मार्च 2018 तक मात्र चार शादियां ही हुईं रजिस्ट्रार के यहां दर्ज

भभुआ सदर : वैसे तो कैमूर जिले में खास कर भभुआ और मोहनिया शहर में साल भर बैंड-बाजे बजते हैं. लेकिन, सरकारी रिकॉर्ड में 100 की भी शहनाई नहीं गूंजती. क्योंकि, किसी भी विवाह का कानूनी प्रमाण माना जाता है उसका मैरिज सर्टिफिकेट. लेकिन, कैमूर जिले के लोग इसको लेकर काफी उदासीन हैं. अब इसे जागरूकता की कमी कहें या फिर प्रचार-प्रसार की कमी. कारण दूसरा भी हो सकता है. वजह कोई भी हो. लेकिन, अगर मैरिज रजिस्ट्रेशन की बात करें,
तो जिला अवर निबंधक कार्यालय में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013 में 12, 2014 में 20, 2015 में 21, 2016 में 31, 2017 में 37, तो मार्च 2018 तक मात्र चार शादियां ही अब तक निबंधन कार्यालय में संपन्न हुई है. वैसे कानूनी रूप से मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य माना जाता है. इसके बावजूद कैमूर की जनता खास कर भभुआ और मोहनिया जैसे शहर का रूप लेते जगहों में भी मैरिज रजिस्ट्रेशन को लेकर जागरूकता अब तक नहीं आ पायी है.
इन निर्देशों का पालन कर कराएं निबंधन : जिस भी जगह रहते हों, वहां प्रशासन के दफ्तर से आवेदन पत्र प्राप्त करें और आवेदन पत्र को सावधानी से भरें, सही-सही जवाब दें. शादी के बाद नाम या सरनेम में कोई बदलाव हुआ हो तो आवेदन पत्र में नया नाम दर्ज करें, इसका प्रमाण संलग्न करें. इस फॉर्म पर तीन गवाहों के हस्ताक्षर करवाये, जो कि रिश्तेदार, दोस्त या पड़ोसी हो सकते हैं. गवाहों का विवरण भी फॉर्म में भरना होगा. रजिस्ट्रेशन ऑफिस में सभी दस्तावेजों की जांच होगी. हस्ताक्षर करवाने के बाद इन पर मुहर लगेगी और इसकी प्रतिलिपियां निकाली जायेंगी.
क्यों जरूरी होता है मैरिज सर्टिफिकेट कानूनी रूप से देखा जाये, तो शादी के बाद बैंक में ज्वाइंट अकाउंट खुलवाने, स्पाउज वीजा हासिल करने, ज्वाइंट प्रॉपर्टी लेने जैसे तमाम कार्यों के लिए अपनी शादी का प्रमाणपत्र जरूरी है. मैरिज सर्टिफिकेट कई तरह की परेशानियों से भी मुक्त कर सकता है. अगर शादी के बाद नाम या सरनेम नहीं बदलना चाहते, तो शादी से संबंधित सभी कानूनी अधिकार और लाभ दिलाने में इस सर्टिफिकेट से मदद मिलती है. पासपोर्ट बनाने, वीजा हासिल करने जैसे तमाम कार्यों के लिए वैवाहिक प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है.
कैमूर जिले में किस साल कितने हुए रजिस्ट्रेशन
रजिस्ट्रेशन के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत
पति-पत्नी के हस्ताक्षर वाला आवेदन पत्र
आयु या जन्म का प्रमाण पत्र
आवासीय प्रमाण पत्र (लड़की शादी से पहले जहां रहती हो, वहां का आवासीय प्रमाणपत्र)
शादी के फोटोग्राफ, निमंत्रण पत्र, मंदिर में शादी हुई हो, तो पुजारी द्वारा जारी प्रमाणपत्र
यदि विदेशी से शादी हुई हो, तो उसके देश की एंबेसी द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट
यदि लड़की शादी के बाद सरनेम बदलना चाहती है, तो एक नॉन ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर, जिस पर पति-पत्नी द्वारा अलग-अलग एफिडेविट हो. इन सभी दस्तावेजों पर राजपत्रित अधिकारी का हस्ताक्षर और मुहर जरूरी है.
कैसे होता हैं निबंधन कार्यालय में पंजीकरण
गौरतलब है कि हिंदू विवाह अधिनियम (1955) या विशेष विवाह अधिनियम (1954) में से किसी एक के तहत शादी को पंजीकृत किया जा सकता है. हिंदू विवाह अधिनियम केवल हिंदुओं पर लागू होता है. जबकि, स्पेशल मैरिज एक्ट भारत के समस्त नागरिकों पर लागू होता है.
मैरेज सर्टिफिकेट है बहुत जरूरी
जिला अवर निबंधक पदाधिकारी तारकेश्वर पांडेय कहते हैं कि मैरिज सर्टिफिकेट अनिवार्य है. इसके लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है. आवेदन जमा करने के लगभग 30 दिन के भीतर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है. आवेदन के बाद पंजीकरण केंद्र के बोर्ड पर शादी से संबंधित सूचना लगा दी जाती है, ताकि वर-वधू के किसी भी संबंधी को कोई आपत्ति हो तो वे इसे दर्ज कर सके. अगर कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती तो सूचना प्रकाशित होने के एक महीने बाद विवाह संपन्न माना जाता है. यदि किसी द्वारा आपत्ति मिलती है, तो जांच के बाद निर्णय लिया जाता है शादी होगी या नहीं. विवाह निबंधन के लिए 250 रुपया शुल्क है. लड़का व लड़की दोनों को प्रमाणपत्र मिलता है. इसके 200 रुपये लगते हैं. पंचायत या वार्ड स्तर पर आवेदन वाले दिन प्रमाणपत्र मिलता है. यहां सौ रुपया शुल्क है. एक माह बाद एक हजार रुपया जुर्माना है.
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