पानी के लिए भटक रहे वन जीवों पर बढ़ा खतरा

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भभुआ : गर्मी में कैमूर के जंगली प्रक्षेत्र में जैसे ही पानी का संकट खड़ा होता है. वैसे ही पानी के लिए भटक रहे प्यासे जंगली जीवों के जान पर खतरा भी बढ़ जाता है. गौरतलब है कि जिले के वन प्रक्षेत्र में बाघ, चीता, हिरण, सूअर, भालू, सांभर, नीलगाय जैसे जंगली जीव सहित मोर […]

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भभुआ : गर्मी में कैमूर के जंगली प्रक्षेत्र में जैसे ही पानी का संकट खड़ा होता है. वैसे ही पानी के लिए भटक रहे प्यासे जंगली जीवों के जान पर खतरा भी बढ़ जाता है. गौरतलब है कि जिले के वन प्रक्षेत्र में बाघ, चीता, हिरण, सूअर, भालू, सांभर, नीलगाय जैसे जंगली जीव सहित मोर और साहिल जैसी पक्षियों का भी आवासन है. लेकिन, जैसे ही वन प्रक्षेत्र में पानी का संकट खड़ा होता है, वैसे ही प्यासे वन जीव पानी के लिए मैदानी क्षेत्र में उतरने लगते हैं. यहां उनके जीवन पर खतरा मंडराने लगता है.

कई बार हिरण जैसे प्यासे जंगली जीवों को ग्रामीण क्षेत्र में जलाशयों के आसपास घेर कर शिकार खानेवाले शौकीनों द्वारा मार दिया जाता है. कई बार वन विभाग द्वारा ऐसे जीवों का मांस और खाल भी बरामद किया गया है. इसी तरह जंगली जीवों को अकेला पाकर मैदानी क्षेत्र में कुत्ते भी नोंच डालते हैं.

बोले डीएफओ
डीएफओ सत्यजीत सिंह कहते हैं कि वन प्रमंडल के पास तीनों रेंजों में मिला कर चार टैंकर हैं, जो पर्याप्त नहीं है. इन टैंकरों से चेक डैमों को भरने के साथ गर्मी में सूख रहे पौधों को पानी देना, आग लगने पर जहां रास्ता है वहां टैंकर से पानी भेजने के साथ चेक डैमों को भी पानी भर कर मेंटेनेंस रखना संभव नहीं हो पाता है. क्योंकि, गर्मी में पानी की खपत चौतरफा बढ़ जाती है.
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