लालू ने अगर अपनी आत्मा बेची होती, तो जेल के पीछे नहीं होते : जगदानंद
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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रमकरपुर धाम पर विचार गोष्ठी में शामिल हुए चार जिलों के राजद कार्यकर्ता नुआंव : प्रखंड के रमकरपुर धाम पर राष्ट्रीय जनता दल की विचार गोष्ठी में शामिल हुए चार जिलों के कार्यकर्ताओं को संबोधन में राजद के पूर्व बक्सर सांसद जगदानंद सिंह के तेवर तल्ख दिखे. उन्होंने कहा कि आपने देखा की देश की […]
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रमकरपुर धाम पर विचार गोष्ठी में शामिल हुए चार जिलों के राजद कार्यकर्ता
नुआंव : प्रखंड के रमकरपुर धाम पर राष्ट्रीय जनता दल की विचार गोष्ठी में शामिल हुए चार जिलों के कार्यकर्ताओं को संबोधन में राजद के पूर्व बक्सर सांसद जगदानंद सिंह के तेवर तल्ख दिखे. उन्होंने कहा कि आपने देखा की देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के पांच जजों ने अपना क्या बयान दिया कि लोकतंत्र खतरे में है, लालू प्रसाद ने अगर अपनी आत्मा बेची होती, तो वह सलाखों के पीछे नहीं होते. परंतु, आरएसएस वाले भूल गये, यह धर्मयुद्ध है. जबतक, पांडवों यानी गरीबों की विजय नहीं हो जाती, यह चलता रहेगा. पूर्व सांसद ने कहा कि भारत को गुलाम विदेशियों ने नहीं बल्कि यहां के राजाओं और पूंजीपतियों ने बनाया था. यह भारत बड़ी तिजोरी वालों का नहीं,
यह देश गांधी, बाबा साहेब आंबेडकर, जगदेव बाबू जैसे लोगों का है. इस देश में फायदा हो तो सभी को, घाटा हो तो सभी को, परंतु आज इस देश में ऐसी नीति तय की गयी है कि गरीबों के पेट खाली होते जा रहे और देश में अमीरों के खजाने भरते जा रहे है. अमीरों के बेटे देश की सरहद पर रखवाली नहीं करते, वहां खड़े होते हैं देश की हिफाजत के लिए किसानों के बेटे, पर उनके बेटों के घरों में उनके परिजनों द्वारा उपजाये गये अन्न की कीमत का मानक ये तय करते हैं, देश की सत्ता पर उनका कब्जा है. आज रुपये के अभाव में गरीबों का बेटा पढ़ाई नहीं कर पाता.
ईश्वरीय शक्ति के बाद दूसरी शक्ति होती है लोकसभा व विधानसभा : सभा को संबोधित करते हुए सासाराम विधायक अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ईश्वरीय शक्ति के बाद दूसरी शक्ति लोकसभा व विधानसभा की होती है. देश की लड़ाई सभी धर्मों के लोगों ने मिल कर लड़ाई लड़ कर जीता. कहा कि 1990 के दशक में जब लालू जी गद्दी पर बैठे तो सबसे पहले उनको शाहिद जगदेव का दर्जा दिलवाने का काम किया. जगदानंद सिंह ने नुआंव चौक पर उनकी मूर्ति लगवाने का काम किया. इसलिए आप बिहार से आगाज करे और अंत जब तक दिल्ली की कुर्सी नहीं मिलती, तब तक नहीं बैठने की सौगंध खाएं.
गौरतलब है कि कार्यक्रम को रामगढ़ के पूर्व विधायक अंबिका सिंह, भभुआ के पूर्व विधायक रामचंद्र यादव, ब्रहपुर विधायक शंभु यादव, रोहतास जिलाध्यक्ष विजय मंडल, बक्सर जिलाध्यक्ष शेषनाथ सिंह, मिथिलेश सिंह सहित कई लोगों ने संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीनिवास सिंह ने की. संचालन प्रखंड युवा अध्यक्ष अवधबिहारी सिंह ने किया. मौके पर प्रखंड अध्यक्ष शाहनवाज खान, बिरजू पटेल, श्याम नारायण तिवारी, हरिद्वार सिंह, जितेंद्र खरवार, विश्वामित्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, खेदन कुशवाहा, विकास यादव, अजीब रिजवी सहित कई लोग मौजूद थे.
हजारों कार्यकर्ताओं ने भोज का उठाया लुत्फ, नुआंव. रमकरपुर धाम में राष्ट्रीय जनता दल की विचार गोष्ठी व चूड़ा-दही भोज में शामिल हुए चार जिलों के हजारों कार्यकर्ताओं ने दही-चूड़ा सहित अन्य व्यंजनों को जी भर कर आनंद उठाया. आगंतुकों के मेहमान नवाजी में रामगढ़ के पूर्व विधायक अंबिका सिंह ने खुद ही भोजन का कमान अपने हाथों में ले रखा था. पिछले चार दिनों से कार्यक्रम की तैयारी को लेकर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता व्यस्त रहे. कार्यक्रम के आरंभ में पूर्व बक्सर सांसद जगदानंद सिंह धाम के मंदिर में माल्यार्पण कर कार्यक्रम को आरंभ किया.
राजद समतामूलक समाज का करता है नेतृत्व
पूर्व सांसद ने कहा कि न्याय व्यवस्था आपके खिलाफ जा रही है, आज भी देश के सर्वोच्च न्याय की कुर्सी पर वैसी ही मानसिकता के लोग बैठे हैं. महाभारत के इस युद्ध से लालू प्रसाद को कुछ दिनों के लिए अपनी मक्कारी से बाहर कर दिया है. पर, वह भूल गये तेजस्वी यादव अभी गरीब शोषित लोगों की लड़ाई लड़ने के लिए खड़ा है. राजद समतामूलक समाज का नेतृत्व करता है, गरीबों की हर लड़ाई में वह सबसे पहले आगे है. आपने देखा होगा कि किस तरह बक्सर के नंदन गांव में वृद्ध महिलाओं व ग्रामीणों को सलाखों के पीछे डाला जा रहा है, क्या कसूर था उस वृद्ध का, जिसने सूबे के मुखिया को अपने दलित बस्ती में विकास को देखने के लिए कहा. भाई आप तो गांवों में विकास को ही देखने जा रहे थे. पर, आपने उसकी बात नहीं सुनी और मामला इतना बिगड़ गया. नीतीश और लालू में यहीं फर्क है. लालू जी होते तो वह निश्चित तौर पर उस निरीह की आवाज को सुनते और बस्ती का दौरा कर वहां के अधिकारियों को फटकार लगा वहां की समस्या का समाधान कराते. पर, इन्होंने तो नौ ऐसी महिलाओं को जेल भेजवा दिया, जिनकी उम्र 50 से 60 वर्ष है. इतना ही नहीं दो दलित बस्ती की बहूओं को भी सलाखों के पीछे पहुंचवा दिया.
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