बालू दा ने भी छोड़ा ममता दीदी का साथ, ज्योतिप्रिया मल्लिक ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा

Edited by Ashish Jha
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ज्योतिप्रिया मल्लिक

Jyotipriya Mallik: ज्योतिप्रिया मल्लिक ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि उनका ब्लड शुगर लेवल 350 तक पहुंच गया है. वे किडनी की गंभीर समस्या से भी जूझ रहे हैं. इस स्थिति में उनके लिए पार्टी सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना अब संभव नहीं है.

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Jyotipriya Mallik: कोलकाता. ममता बनर्जी एक बार फिर अकेली पड़ गई हैं. इस बार उनके चहेते ‘बालू दा’ ने ममता दीदी का हाथ छोड़ दिया है. ज्योतिप्रिया मल्लिक ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. पूर्व मंत्री ने पार्टी नेता ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने इस फैसले की जानकारी दी है. इस्तीफे पत्र में हालांकि ज्योतिप्रिया मल्लिक ने अपनी अस्वस्थता का हवाला दिया है, लेकिन उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं.

कार्यकारी समिति में थे शामिल

हाल ही में ज्योतिप्रिया को तृणमूल कांग्रेस की कार्यकारी समिति में शामिल किया गया था. हालांकि, वे अस्वस्थता के कारण जिम्मेदारी संभालने में असमर्थ हैं. पत्र में ज्योतिप्रिया मल्लिक ने यही बात कही है. ज्योतिप्रिया मल्लिक ने पत्र में लिखा है कि उनका ब्लड शुगर लेवल 350 तक पहुंच गया है. वे किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. इस स्थिति में उनके लिए पार्टी के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना अब संभव नहीं है.

ममता के सबसे करीबी लोगों में से एक

ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में ज्योतिप्रिया मल्लिक का नाम सबसे आगे है. तृणमूल की शुरुआत से ही, वे ममता के संघर्ष के दिनों में पार्टी के सिपाही के रूप में उनके साथ खड़े रहे. ममता ने बालू दा का साथ उनके बुरे दिनों में भी नहीं छोड़ा. राशन भ्रष्टाचार मामले में ज्योतिप्रिया के जेल जाने के बाद भी तृणमूल नेता ने उन पर भरोसा किया. उन्होंने यह भी खुलकर दावा किया कि ज्योतिप्रिया को फंसाया गया था, लेकिन, पार्टी के बुरे दिनों में, ममता के बुरे दिनों में, बालू उनका साथ नहीं दे पाए.

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राशन भ्रष्टाचार मामले में हैं आरोपित

राशन भ्रष्टाचार मामले में जेल जाने के बावजूद ममता बनर्जी ने उन्हें विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार क्यों बनाया, इस पर भी काफी आलोचना हुई. इसी बीच, कुछ दिन पहले ज्योतिप्रिया को तृणमूल कांग्रेस की कार्यकारी समिति का सदस्य बनाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति बदल गई. हालांकि उन्होंने शारीरिक बीमारी का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया, लेकिन राजनीतिक हलकों के अनुसार, उन्होंने पार्टी की विफलता के कारण बाकी नेताओं की तरह ही इस्तीफा दिया.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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