जहानाबाद सदर.
प्रधानमंत्री स्वच्छता मिशन के तहत ग्रामीण इलाके में घर-घर जाकर कचरे का उठाव किया जा रहा है लेकिन कचरा उठाव के लिए प्रशासन द्वारा लोगों के लिए निर्धारित की गयी राशि को नहीं वसूल पा रहा है. प्रशासन द्वारा कचरा उठाव के के बदले में प्रत्येक घर से मामूली रूप से 30 रुपये महीने का शुल्क निर्धारित किया है लेकिन प्रशासन द्वारा इसे वसूल नहीं किया जा सका है. बीडीओ द्वारा बैठक कर सभी स्वच्छता कर्मचारियों को निर्धारित राशि को वसूल करने के लिए कई बार आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है. साथ ही उसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया है फिर भी वसूल नहीं हो पा रहा है. जबकि स्वच्छता मिशन के तहत कचरा उठाव करने के लिए स्वच्छता कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना आते हैं. लोग अपने घर का कचरा जमा कर डस्टबिन में रखे हुए रहते हैं. कचरा उठाव के लिए जैसे ही थैला लेकर स्वच्छता कर्मचारी आता है, लोग डस्टबिन से उसे डाल देते हैं लेकिन जब निर्धारित शुल्क देने की बारी आती है तब लोग आना-कानी करने लगते हैं जिससे निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहा है. प्रशासन द्वारा तमाम कोशिशों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में कचरा उठाव के बदले में प्रशासन द्वारा निर्धारित 30 रुपये प्रत्येक महीने की राशि महज 30 प्रतिशत लोग ही जमा कर रहे हैं. 70 प्रतिशत लोग राशि जमा करना मुनासिब भी नहीं समझ रहे हैं. प्रशासन द्वारा इसके लिए कई बार जागरूकता अभियान चला कर लोगों को निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए जागरूक किया गया है लेकिन इसका असर लोगों पर नहीं पड़ रहा है जिससे स्वच्छता मिशन अभियान पर ग्रहण लगता दिख रहा है.
गांव में दिखती है सफाई : प्रधानमंत्री स्वच्छता मिशन के तहत ग्रामीण इलाके में स्वच्छता कर्मचारियों द्वारा रोजाना की जा रही कचरे उठाव का असर ग्रामीण इलाके में देखने को मिल रहा है. गांव की गली व चौक-चौराहे पर अब कचरा दिखायी नहीं देता है. साफ-सफाई दूर से ही झलकता है. लोग अपने-अपने घर के कचरे डस्टबिन में जमा कर ठेला पर दे देते हैं, जिससे घर के आसपास भी कचरा दिखायी नहीं देता है.
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