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31 साल के बेटे के लिए क्यों मौत मांग रहा बेबस पिता? 12 साल का दर्द जानकर कांप उठेगा कलेजा

Harish Rana Euthanasia: क्या आप कभी सोच सकते हैं कि कोई पिता अपने जिगर के टुकड़े की मौत मांग सकता है? ऐसा सोचकर भी आम आदमी का कलेजा कांप उठता है. लेकिन, यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि हकीकत है. दिल्ली की एक अदालत में एक पिता अपने 31 साल के बेटे के लिए मौत मांगता दिखाई दिया. इस पिता का नाम अशोक राणा है. अशोक राणा भरी अदालत में बेटे हरीश के लिए न्याय मांगने के बजाय मौत मांगते दिखाई दिए. अब आपके मन में यह सवाल पैदा हो रहा होगा कि आखिरी अशोक राणा अपने जिगर के टुकड़े के लिए भरी अदालत में मौत की मांग क्यों कर रहे थे? जब आप इसके पीछे की कहानी जानेंगे, तो दिल दहाड़ मारने लगेगा. इस पूरे मामले के पीछे 12 साल लंबी पीड़ा की एक पूरी कहानी है.

Harish Rana Euthanasia: साल 2013, एक भयानक हादसे ने हरीश राणा के जीवन को थाम दिया. चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में आई गंभीर चोटों ने उसे कोमा की उस गहरी नींद में सुला दिया, जिससे वह कभी तक नहीं जागा. 12 साल से अधिक समय से हरीश का जीवन केवल मशीनों के सहारे चल रहा है. एक ऐसी सांस जो प्रकृति की नहीं, बल्कि मशीनों की मोहताज है.

पिता ने कोर्ट से मांगी इच्छामृत्यु

हरीश के पिता अपने बच्चे के लिए कोर्ट से इच्छामृत्यु की मांग की. वकील ने कोर्ट के सामने बेबस पिता के उस असहनीय दर्द को रखा, जिसमें वे अब यह नहीं चाहते कि हरीश को और कष्ट सहना पड़े. भावुक कर देने वाला क्षण तब आया जब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने 13 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हरीश के माता-पिता और छोटे भाई से मुलाकात की. परिवार ने एक ही स्वर में कहा कि यदि इलाज प्रभावी नहीं हो रहा है, तो इस तरह का कृत्रिम जीवन जारी रखने का कोई अर्थ नहीं है. वे मानते हैं कि हरीश कष्ट में है और उसे दर्द और पीड़ा से मुक्ति मिलनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट जज जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे पहले पीठ ने एम्स के डॉक्टरों की ओर से राणा की रिपोर्ट को भी देखा था. जिसके बाद कहा था, यह एक दुखद रिपोर्ट है.

ArbindKumar Mishra
ArbindKumar Mishra
मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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