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बीड में होली की अनोखी परंपरा, दामाद को कराई जाती गधे की सवारी, फिर मिलता है सम्मान

Updated at : 03 Mar 2026 6:20 PM (IST)
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Holi

बीड में होली की अनोखी परंपरा, फोटो- एआई

महाराष्ट्र के बीड जिले के विदा गांव में होली पर 90 साल पुरानी अनोखी परंपरा आज भी निभाई जा रही है. परंपरा के अनुसार दामाद को गधे की सवारी कराई जाती है. त्योहार से पहले दामाद की तलाश होती है और चुने गए व्यक्ति की मित्रवत निगरानी की जाती है. सवारी के बाद उसे नए कपड़े और पारंपरिक उपहार देकर सम्मानित किया जाता है, जो सामुदायिक मेल-जोल और आनंद का प्रतीक है.

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Holi 2026: देश में जहां होली रंगों और पानी की बौछारों के साथ धूमधाम से मनाई जाती है, वहीं महाराष्ट्र के बीड जिले के विदा गांव में 90 साल पुरानी एक अनोखी परंपरा आज भी जीवित है. यहां होली के दिन दामाद को गधे की सवारी करवाई जाती है, जो पूरे गांव के लिए त्योहार का सबसे मजेदार पल होता है. यह अनोखी परंपरा त्योहार से कुछ दिन पहले शुरू होती है, जिसे स्थानीय लोग दामाद की तलाश कहते हैं. इस अनेखी परंपरा को लेकर एक निवासी ने कहा ‘यह परंपरा करीब नौ दशक पुरानी है और इसकी शुरुआत अनंतराव देशमुख नाम के एक ग्रामीण ने की थी. अपने दामाद को गधे पर बिठाकर घुमाने के एक हल्के-फुल्के मजाक के रूप में शुरू हुई यह परंपरा धीरे-धीरे पूरे गांव के लिए बेसब्री से प्रतीक्षित एक वार्षिक अनुष्ठान में बदल गई.’

गांव के लोग करते हैं निगरानी

ग्रामीणों ने बताया कि होली से एक सप्ताह पहले गांव के युवाओं के समूह विदा में रहने वाले या वहां आने वाले योग्य दामादों की पहचान करने के लिए खोज दल बनाते हैं. दामाद का चयन हो जाने के बाद, चुने हुए व्यक्ति को मित्रवत निगरानी में रखा जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह इस महत्वपूर्ण दिन से पहले भाग न जाए. होली या धुलीवंदन की सुबह, ढोल की थाप और रंगों की बौछार के बीच दामाद को गधे पर बैठाया जाता है. पुराने जूतों की माला पहनाकर, उसे गांव की गलियों में घुमाया जाता है, जहां निवासी जयकारे लगाते हुए जश्न मनाते हैं.

सामुदायिक बंधन की परंपरा

गधे की सवारी की मजेदार और व्यंग्यात्मक प्रकृति के बावजूद, यह परंपरा किसी भी तरह की दुर्भावना से परे है और गांव के लोगों के बीच सामुदायिक एकता और मेल-जोल को मजबूत करने का माध्यम बन चुकी है. यह परंपरा न केवल मनोरंजन का अवसर है बल्कि सम्मान और याद का भी प्रतीक बन गया है. इस साल जुलूस शुरू होने से पहले सभी प्रतिभागियों ने दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के चित्र पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

दामाद को दिया जाता है नए कपड़े और सोने की अंगूठी

एक ग्रामीण ने बताया कि गधे की सवारी के बाद एक औपचारिक सम्मान समारोह होता है. परंपरा के अनुसार, गांव वाले दामाद को नए कपड़े, एक साड़ी और एक सोने की अंगूठी भेंट करते हैं. हालांकि, सोने की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के कारण, ग्राम समिति ने इस साल पारंपरिक पोशाक को ही उपहार के रूप में देने का फैसला किया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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