जहानाबाद नगर
. शहर के श्याम नगर मुहल्ले में भागवत कथा चल रहा है. भागवत कथा के अलग-अलग प्रसंगों की चर्चा हो रही है. वृंदावन से आये संत स्वामी कमलनयन महाराज ने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम लेने से ही आपका कल्याण हो जायेगा, सिर्फ 5 मिनट भी अगर भगवान की भक्ति करते हैं तो आपको मुक्ति मिल जायेगी. सिर्फ गोविंदाये नमो नमः का जाप करने से आप घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहेगी. स्वामी ने भागवत की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान की पूजा और भक्ति करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. भक्त ध्रुव और प्रह्लाद ने 5 वर्ष की आयु भगवान नारायण की भक्ति शुरू कर दी थी. स्वामी ने भक्त प्रह्लाद की जीवनी की चर्चा की. उन्होंने ने कहा कि भक्त प्रह्लाद को बचपन से ही कई प्रकार की यातनाएं दी गईं. हमेशा नारायण उनकी रक्षा करते रहे. आग से जलाने का प्रयास किया गया लेकिन फिर भी भगवान की कृपा से सुरक्षित बच गये, तब जाकर फिर हिरण्यकशयपू ने प्रह्लाद से पूछा कि तुम्हारी रक्षा कौन कर रहा है. उसने कहा कि जो सब की रक्षा करते हैं. जो सभी जगहों पर रहते हैं, खंभे में भी हैं. वहीं मेरी रक्षा कर रहे हैं. आप भी उनके शरण में चले आये. भगवान आप का भी कल्याण कर देंगे. इसके बाद भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर प्रहलाद के पिता को ब्रह्माजी के वरदान के अनुसार शाम के समय अपने जांघ पर कर हत्या की. भागवत की कथा के दौरान स्वामी जी ने सृष्टि कैसे हुई उसकी भी चर्चा की. भागवत कथा की महता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कलयुग में माता और पिता साक्षात देव हैं. जो लोग माता पिता और सास, श्वसुर की सेवा करते हैं, उन पर भगवान नारायण की कृपा होती है. उनके घर में हमेशा खुशहाली आती है और जहां मां और पिता का अपमान हो रहा है, वहां कलह का वास होता है. धन की हानि होती है. आज बड़े पैमाने पर वृद्धा आश्रम बन रहा है जो काफी दुर्भाग्य है. वृन्दावन में एक ऐसा आश्रम है जहां पांच हजार से अधिक माताएं रहती हैं.
कलियुग में बुजुर्गों पर अत्याचार काफी बढ़ गया है. लोग जागे और अपने मां और पिता की सेवा करें, तभी आपका कल्याण संभव है. स्वामी जी ने समुद्र मंथन की चर्चा भी की. कैसे समुन्द्र का मंथन हुआ. देवता और असुर ने एक साथ मिलकर समुद्र का मंथन किया सबसे पहले मंथन से विष निकला. उसका रसपान भगवान भोलेनाथ ने की. कथा के दौरान भगवान नारायण मोहिनी रूप धारण कर कैसे देवताओं को अमृत पान कराया. इस समय दो असुर भी देवताओं का रूप बदलकर अमृत पी ली. भगवान ने सूदर्शन चक्र से दोनों का गला काट दिया. वहीं राहु और केतू हुए जो ग्रह के रुप में आपको आज सता रहा है. राजा बलि के बारे में में भी बताया गया. राजा बलि से भगवान नारायण ने तीन पग जमीन मांग देवताओं को देवलोक लौटा दिया. माता लक्ष्मी ने राजा बलि को अपना भाई बनाया. इसकी जानकारी भी कथा के दौरान भक्तों को दी गई. भगवान कृष्ण जन्मोत्सव के बाद उनकी बाल लीलाओं पर भी चर्चा करते हुए स्वामी कमलनयन जी महाराज ने कहा कि भागवत महा सागर है. इसमें विज्ञान और ज्ञान का भंडार है. पांच हजार साल पहले जो कथा लिखी गई थी वह साकार दिख रही है. कथा के अंत में भगवान नारायण की आरती हुई. इसके पहले भजन का दौर भी चलता रहा.
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