गंगासागर में शंकराचार्य निश्चलानंद : हिंदू सुरक्षित रहेंगे, तभी विश्व बचेगा, बांग्लादेश हिंसा पर भारत के मुसलमानों की चुप्पी पर उठाये सवाल

सागर द्वीप के गंगासागर मेला प्रांगण में पत्रकारों को संबोधित करते पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज. फोटो : एएनआई
Shankaracharya in Gangasagar: पश्चिम बंगाल में हर साल मकर संक्रांति पर लगने वाले गंगासागर मेला में पुण्य स्नान के लिए पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सागर द्वीप पहुंच चुके हैं. उन्होंने कहा कि हिंदू सुरक्षित रहेंग, तभी विश्व बचेगा. उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मुद्दे पर भारत के मुसलमानों की चुप्पी पर सवाल भी उठाये. शंकराचार्य ने कहा कि दीघा के जगन्नाथ मंदिर की तुलना पुरी के जगन्नाथ मंदिर से करना उचित नहीं है. उन्होंने और क्या-क्या कहा, यहां पढ़ें.
Shankaracharya in Gangasagar| शिव कुमार राउत, गंगासागर : मकर संक्रांति के अवसर पर पुण्यस्नान के लिए गंगासागर पहुंचे पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में देश, प्रदेश और विदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे. उन्होंने सर्वप्रथम बांग्लादेश में हो रही हिंसा की कड़ी भर्त्सना की और इस मुद्दे पर भारतीय मुसलमानों की चुप्पी पर सवाल उठाये.
सुलमानों के पूर्वज भी थे सनातनी हिंदू – स्वामी निश्चलानंद
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बांग्लादेश और भारत के मुसलमान यह जान लें कि उनके पूर्वज सनातनी हिंदू ही थे. यहां तक कि ईसा मसीह के पूर्वज भी हिंदू थे. शंकराचार्य ने भारतीय हिंदुओं से देशभक्ति का परिचय देने का आह्वान करते हुए कहा कि बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों में समर्थन नहीं, बल्कि विरोध आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू सुरक्षित रहेंगे, तभी विश्व सुरक्षित रहेगा.
बांग्लादेश मामले में सरकार उठा रही जरूरी कदम – शंकराचार्य
बांग्लादेश को लेकर भारत सरकार की भूमिका पर उठ रहे सवालों के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठा रही है. जो किया जाना चाहिए, वह सब हो रहा है. उन्होंने कहा कि हर कार्रवाई सार्वजनिक रूप से बोलकर नहीं की जाती. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा स्थिति का समाधान सद्भावनापूर्ण संवाद के माध्यम से ही संभव है.
शंकराचार्य का पद पीएम और राष्ट्रपति से भी ऊपर
उन्होंने स्वयं को राजनीति से दूर रखते हुए कहा कि वह शंकराचार्य हैं और देश में यह पद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पद से भी ऊपर माना जाता है. ऐसे में वह ऐसा कुछ नहीं कहना चाहते, जिससे सरकार के लिए अमल की बजाय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो.
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दीघा के जगन्नाथ मंदिर की पुरी से तुलना अनुचित
शंकराचार्य ने पश्चिम बंगाल के दीघा में जगन्नाथ मंदिर के निर्माण को सराहा. लेकिन यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा उसकी तुलना पुरी के जगन्नाथ धाम से करना निंदनीय है. उन्होंने बताया कि देश में कुल आठ धाम हैं- अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन), द्वारका और पुरी. इसी क्रम में उन्होंने पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की ओर अप्रत्यक्ष संकेत करते हुए व्यंग्य किया कि यदि कोई सरकार स्कूल बंद कर मंदिर बनाती है, तो वह अनुचित है. ऐसे स्थान को धाम नहीं कहा जा सकता.
तपोस्थली बनाम पर्यटन स्थल, विकास की नयी परिभाषा
राज्य सरकार द्वारा मुड़ीगंगा नदी पर पुल के शिलान्यास पर शंकराचार्य ने असंतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में तपोस्थलियों को पर्यटन केंद्र में बदला जा रहा है, जिससे तीर्थस्थलों का अस्तित्व संकट में पड़ रहा है. उन्होंने बदरीनाथ और केदारनाथ तक रेल मार्ग को विकास की नयी परिभाषा का उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे पर्यटन व्यवसायियों और शासन तंत्र को तो लाभ होता है, लेकिन तपोस्थलियों के लिए यह विकास त्रासदीपूर्ण सिद्ध हो रहा है.
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By Mithilesh Jha
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