जहानाबाद नगर.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) एसएस कॉलेज इकाई द्वारा जिले की एक छात्रा के साथ पटना के मुन्ना चौक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई दरिंदगी और इलाज के दौरान हुई उसकी दुखद मृत्यु के विरोध में आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया. एबीवीपी ने इस घटना को न केवल मानवता को शर्मसार करने वाला बताया, बल्कि राज्य में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला करार दिया.
परिषद ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता का परिणाम है, जहां एक छात्रा को सुरक्षित माहौल देने में प्रशासन पूरी तरह असफल रहा. आक्रोश मार्च के माध्यम से विद्यार्थी परिषद ने बिहार सरकार से इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच कराने तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. परिषद ने स्पष्ट किया कि जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. इस दौरान विभाग समाचार प्रमुख गोपाल शर्मा ने कहा कि प्रारंभिक जांच से यह प्रतीत होता है कि हॉस्टल संचालक द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया गया है. आरोप है कि हॉस्टल संचालक ने अस्पताल के कुछ लोगों से मिलीभगत कर घटना की गंभीरता को छिपाने की कोशिश की, जो अत्यंत गंभीर और आपराधिक कृत्य है. उन्होंने मांग की कि केवल प्रत्यक्ष अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि मामले को दबाने की कोशिश करने वालों पर भी समान रूप से कठोर कार्रवाई की जाए. आक्रोश मार्च के दौरान छात्रों ने हाथों में तख्तियां लेकर दोषियों को फांसी दो, छात्राओं को सुरक्षा दो, न्याय नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा जैसे नारे लगाए और प्रशासन से त्वरित न्याय की मांग की। कार्यक्रम में छात्रों का आक्रोश स्पष्ट रूप से देखा गया. आंदोलन में प्रमुख रूप से कॉलेज मंत्री सोनू कुमार, कॉलेज उपाध्यक्ष रूपेश कुमार, दीपू कुमार, पूर्व प्रांत उपाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार राय, हिंदी विभाग के शिक्षक डॉ भगवत शर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता और छात्र मौजूद रहे. सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि समाज में महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
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