जहानाबाद : सरकारी अस्पताल बदहाल, बाहर से खरीदनी होती है ज्यादातर दवाई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 May 2018 3:53 AM
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जहानाबाद नगर : सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने का दावा विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही बयान करती हैं. अस्पताल में आने वाले मरीजों को पर्ची पर लिखी आधी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती है. दवाएं बाहर से खरीद ही […]
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जहानाबाद नगर : सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने का दावा विभाग द्वारा किया जाता है लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही बयान करती हैं. अस्पताल में आने वाले मरीजों को पर्ची पर लिखी आधी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती है. दवाएं बाहर से खरीद ही अपने मर्ज का इलाज करना पड़ रहा है.
हालांकि विभाग द्वारा दवाओं की कमी नहीं रहने का दावा किया जाता है लेकिन अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. विशेषकर इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को तो आधी से अधिक दवाएं बाहर से ही खरीदकर लानी पड़ती है, तभी उनका बेहतर इलाज हो पाता है. ऐसे में सरकारी अस्पताल की उपयोगिता से पर्ची लिखने तक ही रह गया है. सरकार द्वारा मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएं एक-एक कर बंद होती जा रही है. अस्पताल में ओपीडी में इलाज कराने आने वाले मरीजों को 33 प्रकार की दवा दिये जाने की घोषणा सरकार ने की है लेकिन वर्तमान में उन्हें 20 तरह की दवाएं ही मिल रही है. वहीं इनडोर में भी आने वाले मरीजों को 110 तरह की दवाएं देने की बात कही जाती है लेकिन वास्तविकता यह है कि उन्हें 80 प्रकार की दवाएं ही मिलती है. इसमें भी कई ऐसे दवाएं हैं, जिसकी कोई उपयोगिता ही नहीं है. ऐसे में अपने मर्ज को ठीक करने के लिए बाहर से दवा खरीदनी पड़त है, जिससे मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है.
क्या कहते हैं मरीज
सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल सिर्फ कहने का है. दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है. वहीं एक्स-रे तथा अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं भी बंद हैं. मरीज पनपतिया देवी ने कहा कि डॉक्टर द्वारा जो दवाएं लिखी गयी हैं, उसमें सिर्फ एक दवा ही मिली है. बाकी अन्य तीन दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी है. मरीज सुबोध कुमार का कहना है कि कभी भी अस्पताल में पूरी दवाइयां नहीं मिल पाती हैं. हमेशा एक-दो दवाइयां ही मिलती हैं. ऐसे में रोग का इलाज कैसे हो पायेगा. रोग अगर ठीक कराना है तो बाहर से दवा तो खरीदनी ही पड़ेगी.
क्या कहते हैं चिकित्सक
सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों के मर्ज के अनुसार ही दवाएं लिखी जाती है. कई बार मरीज कहता है कि कुछ अच्छी दवाएं लिख दी जाये, जिससे कि मर्ज जल्दी ठीक हो जाये. चाहे उसे बाहर से ही क्यों न खरीदनी पड़े. ऐसे में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जाती है. चिकित्सक की मानें तो कई तरह की दवाएं अस्पताल में जो उपलब्ध हैं, उससे मर्ज जल्दी नहीं ठीक हो पाता. ऐसे में बाहर की दवाएं मजबूरन लिखनी पड़ती है. चिकित्सक का यह फर्ज है कि मरीज को बेहतर इलाज मिले. चाहे इसके लिए उन्हें बाहर से ही दवाएं क्यों न खरीदनी पड़े.
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