दूरसंचार आधुनिक सभ्यता की जीवन रेखा : डॉ गौरीशंकर पासवान

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 17 May 2026 3:03 PM

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Jamui News : विश्व दूरसंचार दिवस के मौके पर जमुई नगर परिषद क्षेत्र के महाराजगंज में “मानव समाज और राष्ट्र के विकास में दूरसंचार का महत्व” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क ने पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज में बदल दिया है. वक्ताओं ने दूरसंचार को आधुनिक समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बताया.

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जमुई से पंकज कुमार सिंह की

रिेपार्ट :

”मानव समाज और राष्ट्र के विकास में दूरसंचार का महत्व” विषय पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क ने पूरी दुनिया को ग्लोबल विलेज में बदल दिया है. वक्ताओं ने दूरसंचार को आधुनिक समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बताया.

दूरसंचार बना आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी जरूरत

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. (प्रो.) गौरीशंकर पासवान ने कहा कि दूरसंचार आधुनिक सभ्यता की जीवन रेखा है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मानव शरीर में रक्त संचार जीवन देता है, उसी प्रकार समाज और राष्ट्र के विकास में दूरसंचार अहम भूमिका निभाता है.उन्होंने कहा कि आज मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क ने संचार व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. अब दूरियां खत्म हो चुकी हैं और पूरी दुनिया एक ग्लोबल विलेज के रूप में बदलती जा रही है. उन्होंने कहा कि दूरसंचार केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है.

“संचार क्रांति ने बदल दी भारत की तस्वीर”

स्थानीय व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने कहा कि दूरसंचार आज ज्ञान और जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है. उन्होंने कहा कि संचार क्रांति आधुनिक भारत के विकास की रीढ़ साबित हुई है.उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ की स्थापना 17 मई को हुई थी, जिसके उपलक्ष्य में हर साल विश्व दूरसंचार दिवस मनाया जाता है. आज टेलीविजन और इंटरनेट ऐसे साधन बन चुके हैं, जो दुनिया भर की जानकारी लोगों तक आसानी से पहुंचा रहे हैं.

19वीं सदी से शुरू हुई संचार क्रांति की कहानी

प्रभात कुमार भगत ने कहा कि 19वीं शताब्दी में टेलीग्राफ और टेलीविजन के आविष्कार ने संचार व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया. भारत में 1990 के दशक में संचार क्रांति की शुरुआत हुई और इसका बड़ा श्रेय पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री Ram Vilas Paswan को जाता है.

डिजिटल शिक्षा और इंटरनेट ने बढ़ाया ज्ञान का दायरा

केकेएम कॉलेज के लाइब्रेरियन रामचरित मानस एवं शिक्षक मंटू पासवान ने कहा कि इंटरनेट और दूरसंचार आज सबसे बड़ा ज्ञान स्रोत बन चुके हैं. डिजिटल शिक्षा के कारण अब ज्ञान हर व्यक्ति की पहुंच तक पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बावजूद टेलीविजन की उपयोगिता आज भी बरकरार है.परिचर्चा में मौजूद प्रबुद्ध लोगों ने भी दूरसंचार के महत्व पर अपने विचार रखे और इसे समाज के विकास के लिए जरूरी बताया.

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